11 साल बाद रेणुका जी जू में गूंजेगी दहाड़, जंगली मुर्गे के बदले मिला रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा
हिमाचल के श्री रेणुका जी जू में 11 साल बाद रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा महाराष्ट्र से 1900 किमी का ...और पढ़ें
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नागपुर से हिमाचल पहुंचे 5 साल के नर और 3 साल की मादा टाइगर।
HighLights
11 साल बाद रेणुका जी जू में रॉयल बंगाल टाइगर का आगमन
महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा से 1900 किमी का लंबा सफर तय कर पहुंचे बाघ
1.67 करोड़ की लागत से बना आलीशान आशियाना, पर्यटन को बढ़ावा
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल के वन्यजीव प्रेमियों के लिए रविवार का दिन 11 साल के इंतजार के बाद जश्न लेकर आया। श्री रेणुका जी जू में एक बार फिर रॉयल बंगाल टाइगर दहाड़ेगा।
महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा (नागपुर) टाइगर रेस्क्यू सेंटर से बाघों का जोड़ा 1900 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर रविवार दोपहर 1 बजे रेणुका जी पहुंचा। जोड़े में 5 साल का नर और 3 साल की मादा है। विशेष पिंजरे, डाक्टर और सुरक्षा के बीच 7 सदस्यीय टीम इसे लेकर आई।
जिसका नेतृत्व डीसीएफ शिमला वाइल्डलाइफ डा. शहनवाज (आइएफएस) ने किय। वन्यप्राणी वृत्त शिमला दक्षिण की अरण्यपाल प्रीति भंडारी (आइएफएस) ने बताया कि बाघों के नैसर्गिक व्यवहार के हिसाब से 1.67 करोड़ की लागत से एनक्लोजर, वाटर पूल, नाइट शेल्टर और सुरक्षा दीवारें तैयार की गई हैं।
वन विभाग का दावा है कि टाइगर की एंट्री से रेणुका जी जू अब सिर्फ झील और मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के वाइल्डलाइफ टूरिज्म मैप पर बड़ा आकर्षण बनकर उभरेगा।
जंगली मुर्गे के बदले बाघ - कैसे हुआ सौदा?
यह कोई खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम है। अगस्त, 2026 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से स्वीकृति मिली। हिमाचल ने रेड जंगल फाउल (जंगली मुर्गे) का जोड़ा दिया तो बदले में रायल बंगाल टाइगर का जोड़ा मिला।
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