गुटखा-पान मसाला से भरी हिमाचल की झोली, खजाने में आए 180 करोड़; कहां खर्च करेगी सरकार?
पान मसाला और गुटखा पर लगे सेस से केंद्र सरकार ने देशभर में 4200 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसमें से ...और पढ़ें
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गुटका-पान मसाला से भरी हिमाचल की झोली। फाइल फोटो
HighLights
केंद्र ने पान मसाला, गुटका से 4200 करोड़ रुपये जुटाए।
हिमाचल को स्वास्थ्य खजाने के लिए 180 करोड़ रुपये मिले।
एनएचएम के प्रस्ताव पर मिली यह राशि स्वास्थ्य में लगेगी।
प्रकाश भारद्वाज, शिमला। पान मसाला और गुटखा खाने वालों की जेब से निकला पैसा अब हिमाचल के स्वास्थ्य खजाने तक पहुंचा है। केंद्र सरकार ने पान मसाला और गुटका पर लगाए गए सैस से देशभर में करीब 4200 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। इसमें से हिमाचल प्रदेश को 180 करोड़ रुपये मिले हैं। प्रदेश के नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने केंद्र सरकार के समक्ष इस राशि में हिमाचल की हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव भेजा था।
पान मसाला और गुटका जैसे उत्पादों पर सैस लगाने के पीछे एक तरफ सरकार के लिए राजस्व जुटाना है तो दूसरी तरफ इनके सेवन को हतोत्साहित करना भी उद्देश्य है। तंबाकू और अन्य हानिकारक पदार्थों के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों का बोझ सीधे स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है।
ऐसे में इन उत्पादों से एकत्र राशि का हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र को उपलब्ध कराया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में तंबाकू और गुटका सेवन के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। ऐसे में 4200 करोड़ रुपये के केंद्रीय राजस्व में हिमाचल को मिली 180 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी आर्थिक के साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एनएचएम ने उठाया था हिमाचल का मामला
हिमाचल के नेशनल हेल्थ मिशन ने केंद्र के समक्ष मामला उठाते हुए पान मसाला और गुटका पर लगाए गए सैस से मिलने वाले राजस्व में प्रदेश की हिस्सेदारी मांगी थी। एनएचएम की ओर से इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्र से अब प्रदेश को 180 करोड़ रुपये की राशि मिली है।
देशभर से 4200 करोड़ की वसूली
केंद्र सरकार ने पान मसाला और गुटका पर सैस लगाकर देशभर में करीब 4200 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं। इस बड़ी राशि में राज्यों को भी हिस्सेदारी दी जा रही है। हिमाचल के हिस्से में 180 करोड़ रुपये आए हैं। इससे प्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हुए हैं। गुटका और पान मसाला का सेवन मुंह के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण माना जाता है।
इन उत्पादों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने के पीछे लोगों को इनके सेवन से दूर करने का उद्देश्य भी जुड़ा है। अब इसी सैस से मिली राशि का एक हिस्सा हिमाचल को मिलने से स्वास्थ्य क्षेत्र में इसका उपयोग किए जाने की उम्मीद है।
