Himachal Assembly Winter Session 2024: प्रश्नकाल के बाद पहली बार होगा शून्यकाल; ई-विधान ऐप का किया जाएगा इस्तेमाल
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Himachal Assembly Winter Session 2024) में कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। पहली बार राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेश ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, शिमला। धर्मशाला के तपोवन स्थित विधानसभा में 18 से 21 दिसंबर तक चलने वाला शीतकालीन सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण रहेगा। पहला कारण यह कि सत्र में पहली बार राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) का प्रयोग किया जा रहा है।
दूसरा विधानसभा में पहली बार शून्यकाल (जीरो आवर) की व्यवस्था शुरू होगी। यह व्यवस्था प्रश्नकाल के तुरंत बाद होगी, जिसकी अवधि 30 मिनट की होगी। विषय उठाने के लिए सदस्य को बहुत कम समय मिलेगा। यानी सदस्य को अपना विषय दो से तीन मिनट में रखना होगा। एक नोटिस में एक से अधिक विभागों के मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं मिलेगी।
जनहित मामलों के लिए डेढ़ घंटे पहले करना होगा सूचित
विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा ने सोमवार को इस आशय संबंधी अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के अनुसार सदन में यह व्यवस्था विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम, 346 के तहत की गई है, जिसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष अपनी शक्तियों का प्रयोग करके ऐसी अनुमति प्रदान कर सकते हैं।
शून्यकाल के दौरान लोक महत्व यानी जनहित मामलों को उठाने के लिए बैठक प्रारंभ होने से डेढ़ घंटा पहले विधानसभा अध्यक्ष या सचिव को लिखित या ऑनलाइन माध्यम से सूचित करना होगा।
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हर दिन 10 विषयों को उठाने की मिलेगी अनुमति
विधानसभा को मिलने वाले ऐसे नोटिस में से हर दिन के लिए 10 विषयों को उठाने की अनुमति मिलेगी। ऐसे विषय बैलट की प्राथमिकता के आधार पर उठाए जा सकेंगे तथा संबंधित मंत्री के उत्तर के बाद इस पर अनुपूरक चर्चा नहीं होगी।
इससे पहले हिमाचल प्रदेश विधानसभा की तरफ से तैयार ई-विधान के माध्यम से सत्र की कार्यवाही का संचालन किया जाता रहा है, जिसका अनुसार देश-विदेश की संसदों, विधानसभाओं एवं विधानमंडलों ने अनुसरण किया है। अब राष्ट्रीय स्तर पर ई-विधान एप्लीकेशन को तैयार करके देश की संसद एवं राज्यों की विधानसभाओं को जोड़ा गया है। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
शून्यकाल में विषय उठाने के लिए 10 बिंदु निर्धारित
शून्यकाल में विषय उठाने के लिए 10 बिंदु निर्धारित किए गए हैं। पहला, ऐसे विषय सरकार के क्षेत्राधिकार में आने चाहिए। दूसरा मामला गंभीर एवं तात्कालिक होना चाहिए। तीसरा, विषय सत्र की बैठक के समापन के बाद और दिन की बैठक शुरू होने से पहले की अवधि का हो। चौथा, सदस्य कोई मामला उठाने के लिए तभी नोटिस दे सकता था, जब प्रासंगिक समय पर उसके पास सरकार का ध्यान उन मुद्दों की ओर आकर्षित करने के लिए कोई अन्य विकल्प उपलब्ध न हो।
पांचवां, नोटिस अधिकतम 50 शब्दों से अधिक न हो। छठा, ऐसा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलेगी, जिस पर उसी सत्र में चर्चा हो चुकी हो या संबंधित विषय चर्चा के लिए आना है। सातवां, एक नोटिस के तहत एक से अधिक विभागों के मुद्दे नहीं उठाए जा सकेंगे। आठवां, तर्क, अनुमान, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियां, आरोप, व्यक्ति विशेष या मानहानि, सत्र की कार्यवाही में रुकावट व न्यायालय में विचाराधीन कथन विषय में नहीं आने चाहिए।
नौंवां, विषय में विधानसभा सचिवालय, विधानसभा समिति और अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार की कार्यवाही का उल्लेख नहीं होगा तथा दसवां संबंधित मंत्री सूचना उपलब्ध होने पर जवाब देगा। अन्यथा मंत्री जल्द संबंधित सदस्य को उत्तर उपलब्ध करवाएगा।
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