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हिमाचल में 200 करोड़ का निवेश घोटाला: महिला एजेंटों के माध्यम से लोगों को फंसाया जाल में, CID ने तेज की जांच

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 09 Mar 2026 11:58 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश में वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोआपरेटिव सोसायटी लिमिटेड 200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित निवेश घोटाले की ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में 200 करोड़ रुपये का निवेश फर्जीवाड़ा हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में 200 करोड़ रुपये का निवेश फर्जीवाड़ा हुआ है।

HighLights

  1. वेलफेयर क्रेडिट सोसायटी 200 करोड़ के घोटाले में फंसी।

  2. 5000 एजेंटों, जिनमें महिलाएं प्रमुख, ने निवेश जुटाया।

  3. आरडी, एफडी के नाम पर लोगों से की गई ठगी।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सामने आए कथित निवेश घोटाले में अब वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोआपरेटिव सोसायटी लिमिटेड जांच में घिर चुकी है। शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस सोसायटी के माध्यम से लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक तक की राशि निवेश के नाम पर जुटाई गई। इस नेटवर्क को चलाने के लिए लगभग 5000 एजेंटों की नियुक्ति की थी, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत महिला एजेंट बताई जा रही हैं।

आरडी व एफडी के नाम पर करवाया निवेश

सोसायटी की ओर से आरडी, एफडी और अन्य बचत योजनाओं के नाम पर लोगों से निवेश करवाया जाता था। एजेंट गांव-गांव जाकर योजनाओं के बारे में जानकारी देते थे और लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते थे। इन योजनाओं में तय समय के बाद अधिक रिटर्न मिलने का भरोसा दिया जाता था, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते चले गए।

महिला एजेंटों की भूमिका अहम

सूत्रों के अनुसार नेटवर्क को तेजी से फैलाने के लिए महिला एजेंटों की भूमिका अहम रही। कई मामलों में एजेंट स्थानीय इलाके से ही थीं, जिससे लोगों का भरोसा जल्दी बन गया। 

शुरुआत में किया भुगतान, फिर टालमटोल

शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान भी किया और निवेश की राशि तेजी से बढ़ती चली गई। धीरे-धीरे यह नेटवर्क कई जिलों तक फैल गया, लेकिन कुछ समय से कई निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिल पाई।

सीआईडी के पास पहुंची शिकायत

जब लोगों ने पैसा वापस लेने के लिए सोसायटी के एजेंटों और अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद कई निवेशकों ने शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर मामला सीआइडी तक पहुंचा। 

अब जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की कड़ी-दर-कड़ी जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि कितने लोगों से पैसा जमा करवाया गया और कुल राशि कितनी है। सोसायटी से जुड़े पदाधिकारियों और एजेंटों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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