हिमाचल नगर निगम चुनाव: हार के बाद कांग्रेस को 2027 से पहले बदलनी होगी रणनीति, यहां प्रतिष्ठा भी लगी दांव पर
हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनावों में कांग्रेस को पालमपुर को छोड़कर अन्य प्रमुख निगमों में हार का सामना करना पड़ा ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
कांग्रेस ने केवल पालमपुर नगर निगम में जीत दर्ज की।
भाजपा ने धर्मशाला, मंडी, सोलन नगर निगम जीते।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री अपनी गृह पंचायत में हारे।
राज्य ब्यूरो, शिमला। व्यवस्था परिवर्तन का ध्येय लेकर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भी सत्ता बरकरार रखने के लिए वर्तमान ढर्रे में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रदेश में पार्टी चुनाव चिह्न पर केवल नगर निगम का चुनाव हुआ। चार नगर निगम के चुनाव परिणाम सामने आए हैं, जिसमें सत्तारूढ़ कांग्रेस को प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के पालमपुर नगर निगम में ही जीत से संतोष करना पड़ा है।
जबकि सरकार धर्मशाला नगर निगम को प्रतिष्ठा का प्रश्न मानकर चली थी, यहां भाजपा ने जीत प्राप्त की है। इसी तरह से मंडी और सोलन नगर निगम में भी भाजपा ने जीत हासिल की है।
सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को अब विधानसभा चुनाव जीतने के लिए रणनीति में बदलाव करना होगा, क्योंकि अब कांग्रेस और भाजपा का सीधे विधानसभा चुनाव में आमना-सामना होना है।
कांग्रेस नेताओं का यह दावा
कांग्रेस और मंत्रियों का दावा है कि शेष चुनाव कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने जीते हैं। हालांकि, नगर परिषद, नगर पंचायत और पंचायत, जिला परिषद व बीडीसी सदस्यों का चुनाव दलगत राजनीति से अलग हुआ। कांग्रेस ने 75 प्रतिशत से अधिक सीटों पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों की जीत का दावा किया है।
दिग्गजों के क्षेत्र में मिली है हार
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का अपनी गृह पंचायत में पराजित होना सरकार के लिए राजनीतिक बदलाव की चेतावनी है। कई अन्य मंत्री भी अपने विधानसभा क्षेत्रों में पंचायत, नगर परिषद, नगर पंचायत में जीत दिलाने में असफल रहे हैं।
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी तलाशेगी कारण
हार के कारणों का पता लगाने के लिए कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी कारण तलाशेगी, लेकिन सरकार को जनता के लिए शुरू की गई योजनाओं पर एक बार मंथन करना होगा कि इनमें बदलाव करने की आवश्यकता है।
