शिमला, यादवेन्द्र शर्मा। नदियों में जलस्तर गिरने से हिमाचल में विद्युत उत्पादन भी कम हो गया है, लेकिन अब रात को विद्युत उत्पादन कर उसे बेचने से सरकार मालामाल हो रही है। दिन में तीन से चार रुपये प्रति यूनिट बिकने वाली बिजली को रात बारह बजे के बाद छह रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बेचा जा रहा है। हिमाचल में आजकल बिजली उत्पादन कम होकर 30-35 फीसद रह गया है।

यही नहीं बिजली बचाने के लिए सरकार ने दिन में उत्पादन करने की अपेक्षा रात को उत्पादन शुरू किया है जिसका लाभ यह हो रहा है कि दिन में कई घंटों तक मशीनों को चलाने की अपेक्षा मात्र तीन से चार घंटे में ही बिजली उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में पैदा हो रही बिजली में से तीस लाख यूनिट बिजली बैंकिंग पर दिल्ली की दो कंपनियों को दी जा रही है। इसमें बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) को 24 लाख यूनिट और बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) को छह लाख यूनिट बिजली बैंकिंग पर दी जा रही है। उत्तर प्रदेश को 4.26 रुपये प्रति यूनिट और बिहार को 5.41 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से दोनों को कुल साढ़े चार लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन देने का करार हुआ है।

इसके अलावा करीब दो लाख यूनिट बिजली हर दिन एक्सचेंज में बेची जा रही है और यह बिजली रात को बेचे जाने से छह रुपये प्रति यूनिट बिक रही है। प्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए दिन में बांध (रेजरवायर) में पानी को इकट्ठा करने के बाद शाम छह बजे के बाद मशीनों को तीन से चार घंटे चलाकर बिजली पैदा की जाती है।

मांग पूरी करने को खरीदनी पड़ रही है 22 लाख यूनिट बिजली

प्रदेश में आजकल हर दिन 270 लाख यूनिट बिजली की आवश्यकता है, जबकि करीब 120 लाख यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। हालांकि सेंटर शेयर के तहत हिमाचल को 190 लाख यूनिट बिजली मिल रही है। हिमाचल में बिजली की आपूर्ति का जिम्मा राज्य बिजली बोर्ड के पास है। घटते उत्पादन के कारण प्रदेश में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बिजली बोर्ड ऊर्जा विभाग से 22 लाख यूनिट 2.48 रुपये प्रति यूनिट प्रति दिन के हिसाब से बिजली खरीद रहा है।

हिमाचल में इन दिनों बिजली का उत्पादन बहुत कम हो रहा है। सर्दियों में बिजली बैंकिंग आधार पर लेने के लिए अन्य राज्यों को बैंकिंग पर बिजली दी जा रही है।

- अनिल शर्मा, ऊर्जा मंत्री, हिमाचल प्रदेश

दरें बढ़ाकर भी 40 करोड़ के घाटे में बिजली बोर्ड

हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटिड (एचपीएसईबीएल) 40 करोड़ के घाटे में चल रहा है। बिजली की दरें बढ़ाने के बाद भी बोर्ड घाटे से उबर नहीं पाया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण कपूर ने बुधवार को सरकार के बोर्ड की समीक्षा बैठक की, जिसमें चालीस करोड़ के घाटे को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर विचार किया गया।

वित्तीय वर्ष 2018-19 में घाटे को दूर कर बोर्ड को कमाऊ पूत बनाने के लिए बिजली उत्पादन व आपूर्ति में होने वाली कुल उत्पादन की 11-12 फीसद बिजली की हानि को कम किया जाएगा। बोर्ड 23 लाख 65 हजार उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध करवा रहा है और इसे सालाना 4836 करोड़ की आय हो रही है। बिजली उत्पादन की लागत को भी कम किया जाएगा, जिससे घाटे को कम किया जा सके। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों को पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा की अपेक्षा सस्ती बिजली की आपूर्ति की जा रही है। हिमाचल में उद्योगों को 5.75 रुपये प्रति यूनिट जबकि पंजाब में सबसिडी के बाद 6.08 रुपये प्रति यूनिट और हरियाणा में 6.88 रुपये प्रति यूनिट की दर से आपूर्ति दी जा रही है। एचीएसईबीएल को प्रदेश में स्थापित औद्योगिक इकाइयों से 2800 करोड़ रुपये की सालाना आय हो रही है।

समीक्षा बैठक में सामने आया कि एचीएसईबीएल चालीस करोड़ के घाटे में चल रहा है। इस घाटे को दूर करने के लिए बिजली हानि को कम करने और बिजली कटौती को कम करने को कहा गया है।

-तरुण कपूर, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा

क्या है बिजली हानि 

बिजली का उत्पादन होने के बाद उसे आपूर्ति करने के लिए पहुंचाया जाता है। इस दौरान कुछ बिजली की हानि हो जाती है व पूरी बिजली नहीं पहुंच पाती है। प्रदेश में बिजली के कुल उत्पादन की 11 से 12 फीसद हानि हो रही है। 

By Babita