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हिमाचल सरकार ने वित्तीय संकट के बीच जारी की विधायक क्षेत्र विकास निधि की किस्त, जनजातीय क्षेत्र को प्राथमिकता

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 21 Sep 2026 12:05 PM (IST)

हिमाचल सरकार ने गहरे वित्तीय संकट के बावजूद विधायक क्षेत्र विकास निधि की किस्तें जारी कर दी हैं, जिसमें जनजातीय ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हिमाचल सरकार ने वित्तीय संकट में भी विधायक निधि जारी की।

  2. जनजातीय क्षेत्रों को बर्फबारी से पहले तीसरी किस्त मिली।

  3. विधायक निधि में 50% कटौती पर विपक्ष ने चिंता जताई।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में गहरे वित्तीय संकट के बावजूद सुक्खू सरकार ने विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने के लिए विधायक क्षेत्र विकास निधि की किस्तें जारी कर दी हैं। जनजातीय क्षेत्रों के विधायकों को तीसरी किश्त जारी की गई है, ताकि बर्फबारी से पहले विकास कार्य पूरे हो सकें, जबकि सामान्य क्षेत्रों के विधायकों को अब तक दूसरी किश्त प्राप्त हुई है।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने विधायक निधि को 2.20 करोड़ से आधा घटाकर 1.10 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार ने इसे राजकोषीय घाटा पाटने और खजाने को संतुलित करने की मजबूरी बताया है। इसी वित्तीय अनुशासन के तहत विधायक निधि आधी की गई है, लेकिन सरकार ने किश्तें रोकने के बजाय जनजातीय क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर जारी की हैं। इसका सीधा संदेश है कि सरकार वित्तीय संकट के बावजूद जमीनी विकास को पूरी तरह रोकना नहीं चाहती।

इसी निधि से चलते हैं काम

मुख्यमंत्री से लेकर सत्ता और विपक्ष, सभी विधायकों के क्षेत्र में विकास इसी निधि के सहारे चलता है। विपक्ष इस निधि को लेकर लगातार मुद्दा बनाता रहा है, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों में तीसरी किश्त जारी होने से फिलहाल सर्दियों से पहले काम निपटाने में मदद मिलेगी।

विधानसभा में दोनों पक्ष उठाते रहे हैं मामला

बजट में कटौती के इस फैसले पर विधानसभा में जबरदस्त घमासान हुआ था। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने इसे जनविरोधी बजट करार दिया था। उन्होंने कहा था कि किश्तें पहले ही समय पर नहीं आतीं, ऊपर से 50 प्रतिशत कटौती से गांवों की सड़कें, संपर्क मार्ग और पेयजल योजनाएं ठप हो जाएंगी।

सत्तापक्ष से भी विरोध के स्वर उठे थे। लाहुल-स्पीति की कांग्रेस विधायक अनुराधा राणा ने अपनी ही सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की थी। 

निधि का इतिहास और महत्व

हिमाचल में विधायक निधि की शुरुआत 1999 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने 15 लाख रुपये से की थी। इसके बाद धीरे-धीरे यह बढ़ती गई और 2024-25 में 2.20 करोड़ तक पहुंच गई। हर विधायक को यह राशि 4 किश्तों में मिलती है, इससे गांव के रास्ते, छोटी सड़कें, पैदल पुल, पेयजल की लघु योजनाएं, महिला मंडलों के भवन और बर्तन खरीद जैसे छोटे लेकिन जनहित के काम होते हैं।

क्यों अहम है मौजूदा फैसला

वर्तमान में सरकार का बजट 54,928 करोड़ का है, जो पिछले साल से 3,586 करोड़ कम है। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हर साल 8,105 करोड़ का नुकसान हो रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन को 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक डेफर किया गया था।

 

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