हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र में नौतोड़ पर पात्रता का पैमाना होगा समान, राज्यपाल बोले- गुण-दोष आधार पर होगा फैसला
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ भूमि आवंटन के लिए स्पष्ट और समान पैमाना अपनाने पर ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता। जागरण आर्काइव
HighLights
नौतोड़ भूमि आवंटन के लिए स्पष्ट और समान पैमाना हो।
नशे की आपूर्ति रोकने के लिए बड़े तस्करों तक पहुंचना जरूरी।
हिमाचल में पर्यटन विकास और नए गंतव्यों की तलाश पर जोर।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में लंबे समय से नौतोड़ भूमि के इंतजार में बैठे लोगों के लिए राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने उम्मीद की बात कही है। उन्होंने कहा कि नौतोड़ भूमि आवंटन के लिए स्पष्ट, समान और व्यावहारिक पैमाना होना चाहिए। जमीन उन्हीं पात्र और जरूरतमंद लोगों को मिलनी चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है।
किन्नौर में नौतोड़ को लेकर चल रहे आंदोलन पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की प्रतिक्रियाएं आती रहती हैं। पूरे मामले को वह गुण-दोष के आधार पर देख रहे हैं और कानूनी प्रविधानों की भी जांच की जाएगी।
सभी पहलुओं को समझने के बाद ही उठाया जाएगा कदम
सोमवार को लोक भवन शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि नौतोड़ के मामले में पहले भी निरीक्षण और प्रक्रिया चली है। अब वह स्वयं भी यह देख रहे हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में क्या व्यवस्था संभव हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस विषय से जुड़े सभी पहलुओं को समझने के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी भी उनसे मुलाकात कर इस विषय को उनके समक्ष रख चुके हैं।
नशे के बड़े तस्करों तक पहुंचना जरूरी
प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता जताते हुए राज्यपाल ने कहा कि नशे की आपूर्ति रोकने के लिए सीमा और प्रवेश मार्गों पर निगरानी बढ़ानी होगी। बाहर से हिमाचल में नशा पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई में अक्सर नशे का सेवन करने वाले लोग पकड़े जाते हैं, लेकिन आपूर्ति की पूरी श्रृंखला चलाने वाले बड़े तस्करों तक पहुंचना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती उन करीब 80 प्रतिशत युवाओं को नशे की चपेट में आने से बचाने की है, जो अभी इससे दूर हैं। इसके लिए कार्रवाई के साथ रोकथाम, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी पर भी जोर देना होगा।
पर्यटन में नए गंतव्य तलाशने की जरूरत
राज्यपाल ने हिमाचल में पर्यटन की संभावनाओं को और विस्तार देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कनेक्टिविटी मजबूत करने के साथ हवाई सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। ऐसे पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जाना चाहिए, जहां अभी पर्यटकों की पहुंच कम है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कटरा में विकसित हुए धार्मिक पर्यटन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार और आजीविका के अवसर पैदा हुए हैं।
हिमाचल में भी धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के विषय पर भी उन्होंने सहमति जताई। राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हुई है। हिमाचल में भी पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं, जिनका योजनाबद्ध तरीके से दोहन किया जा सकता है।
विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मानसून सत्र में पारित संबंधित विधेयक के बारे में उन्होंने कहा कि अभी यह मामला उनके पास नहीं आया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को अपनी आमदनी बढ़ाने पर भी जोर दिया। कहा कि विश्वविद्यालयों को धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए आय के नए स्रोत तलाशने होंगे। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी समेत अन्य संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस से दूर रहें तो बेहतर
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल में सरकारी डाक्टरों का निजी प्रैक्टिस नहीं करना अच्छी बात है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर सरकारी सेवा के बाद डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में लग जाते हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उनकी उपलब्धता और ध्यान प्रभावित होता है। सरकारी संस्थानों में डाक्टरों की पूरी उपलब्धता से लोगों को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं।
केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष उठा रहे हिमाचल के मुद्दे
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को वह स्वयं केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष उठा रहे हैं। इसके लिए विभिन्न हितधारकों से फीडबैक भी लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हित से जुड़े मुद्दों को उचित मंच तक पहुंचाने के लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं।
