विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल में पोल्ट्री क्रांति: 62 करोड़ के बजट से बनेंगे होंगे 1000 कमर्शियल फार्म, मिलेगी 10.35 लाख तक सब्सिडी

Published: Wed, 23 Sep 2026 11:24 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 'CHIC' योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 61.95 करोड़ रुपये के बजट से 1000 व्यावसायिक ब्रायलर पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

चूजों से लेकर दाना-दवा तक कंपनी देगी मदद।

चूजों से लेकर दाना-दवा तक कंपनी देगी मदद।

HighLights

  1. 1000 व्यावसायिक पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य

  2. 10.35 लाख रुपये तक की सब्सिडी और 3% ब्याज राहत

  3. ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार के अवसर

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल के गांवों में अब सेब बागवानी और नकदी फसलों के साथ पोल्ट्री भी बड़े स्वरोजगार का जरिया बनेगी। पशुपालन विभाग ने कंप्रेहेंसिव हिमाचल इंटीग्रेटेड कमर्शियल पोल्ट्री स्कीम (सीएचआइसी) के तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश में 1000 व्यावसायिक ब्रायलर पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

इस योजना पर 61.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें पहले वर्ष 50 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य है। विभाग ने इस संबंध में दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। योजना में किसानों के साथ ग्रामीण युवा, महिलाएं, स्वयं सहायता समूह, एफपीओ और सहकारी समितियों को जोड़ा जाएगा।

लाभार्थियों को पूंजी लागत पर 30 प्रतिशत बैक-एंड सब्सिडी, अधिकतम 10.35 लाख रुपये तक मिलेगी।

इसके साथ ही बैंक ऋण पर तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज राहत भी दी जाएगी, जिससे बड़े निवेश की बाधा कम करने का प्रयास किया गया है। योजना का उद्देश्य पंजाब और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों से चिकन की निर्भरता घटाना भी है।

सीएचआइसी के तहत पोल्ट्री यूनिट को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। छोटे यूनिट में 3000 से 5000, मध्यम में 6000 से 10 हजार और बड़े यूनिट में 10 हजार से अधिक पक्षी रखे जा सकेंगे। आधुनिक पर्यावरण नियंत्रित शेड और जैव-सुरक्षा मानकों पर जोर रहेगा।

लाख रुपये तक मिलेगी 30 प्रतिशत सब्सिडी, मिलेगी राहत

यूनिट पहले वर्ष स्थापित करने का लक्ष्य, प्रदेश में विभाग ने दिशानिर्देश किए जारी सरकार की योजना राज्य में पोल्ट्री उत्पादन का मजबूत ढांचा खड़ा करने की है, ताकि अन्य राज्यों से चिकन और पोल्ट्री उत्पादों की आपूर्ति पर निर्भरता घटे।

योजना से ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए गांव में ही व्यावसायिक गतिविधि और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। -चंद्र कुमार, पशुपालन मंत्री।

चूजों के दाने और दवा तक के लिए कंपनी देगी पैसे

चूजे से दाने और दवा तक इंटीग्रेटर माडल योजना में इंटीग्रेटर आधारित माडल अपनाया जा रहा है। विभाग द्वारा चयनित, पंजीकृत इंटीग्रेटर (कंपनी) किसानों को एक दिन के चूजे, दाना, दवाएं, टीके और तकनीकी-पशु चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएंगे।

पक्षी तैयार होने के बाद उन्हें वापस खरीदने की व्यवस्था भी इंटीग्रेटर माडल में होगी, जिससे किसानों को बाजार तलाशने की परेशानी कम होने की उम्मीद है।
पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह योजना में सुविधाकर्ता और क्रियान्वयन एजेंसी की भूमिका निभाएगा, लेकिन किसी व्यावसायिक समझौते का पक्षकार नहीं होगा।

विभाग एक से अधिक इंटीग्रेटर को सूचीबद्ध कर सकता है। एक से अधिक इंटीग्रेटर को सूचीबद्ध कर सकता है विभाग

यह भी पढ़ें- हिमाचल प्रदेश के रेल यात्रियों को झटका, रेलवे ने अक्टूबर तक रद की दौलतपुर चौक-अंबाला पैसेंजर ट्रेन