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हिमाचल में 2027 चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा, 20 से अधिक नाराज नेताओं की घर वापसी पर मंथन

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 09 Jul 2026 11:25 AM (IST)

हिमाचल भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें पिछले चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुँचाने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव बिंदल, अनुराग ठाकुर व जयराम ठाकुर।

हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव बिंदल, अनुराग ठाकुर व जयराम ठाकुर।

HighLights

  1. 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हिमाचल भाजपा।

  2. 20 से अधिक नाराज़ नेताओं की घर वापसी पर मंथन।

  3. संगठन विस्तार और बूथ मजबूती पर भी चर्चा हुई।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल भाजपा ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। इस रणनीति के तहत पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में उन कारणों पर चर्चा हुई, जिनकी वजह से पिछले विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा था। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने टिकट न मिलने पर विद्रोह कर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ा या संगठन से दूरी बना ली, उन्हें समय रहते फिर साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जाए। 

20 से अधिक नाराज नेता

सूत्रों के अनुसार बैठक में बताया कि पिछले चुनाव में करीब 20 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को अपने ही नेताओं की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा था। कई स्थानों पर असंतुष्ट उम्मीदवारों ने भाजपा प्रत्याशियों के वोट काटे, जिससे पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे अनुभवों को देखते हुए संगठन ने इस बार पहले से ही समन्वय और संवाद की रणनीति अपनाने का फैसला किया है। 

असंतुष्ट मना लिए तो राह आसान

बैठक में यह भी माना गया कि यदि अंसतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय रहते साथ जोड़ लिया जाए तो विधानसभा चुनाव में भाजपा अधिक मजबूती के साथ मैदान में उतर सकती है। पार्टी का मानना है कि संगठन की एकजुटता ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होगी। 

पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं पर भी चर्चा

सूत्र बताते हैं कि बैठक में पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर भी चर्चा हुई। मंडी से प्रवीण शर्मा, किन्नौर से तेजवंत सिंह नेगी, कुल्लू से राम सिंह और कांगड़ा से कृपाल परमार सहित कई नेताओं के नामों पर मंथन किया गया। इन नेताओं से संवाद स्थापित कर उन्हें संगठन में सक्रिय भूमिका देने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी नेताओं का संगठन में सक्रिय रहना चुनावी दृष्टि से लाभकारी होगा। कोर कमेटी में संगठन विस्तार, बूथ स्तर को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, जनसंपर्क अभियान और सरकार की नीतियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में नियमित संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर मतभेदों को समय रहते समाप्त करने पर जोर दिया गया।

 

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