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'2031 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनेगा हिमाचल', CM सुक्खू बोले- पहाड़ी राज्यों के विकास का पैमाना अलग तय हो

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:08 PM (IST)Updated: Fri, 16 Oct 2026 06:17 PM (IST)

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने धर्मशाला में ई-गवर्नेंस सम्मेलन में पहाड़ी राज्यों के लिए अलग विकास नीति की वकालत की, क्योंकि उनकी भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से भिन्न हैं।

मंत्रियों के साथ बैठक करते सीएम सुक्खू। फाइल फोटो

मंत्रियों के साथ बैठक करते सीएम सुक्खू। फाइल फोटो

HighLights

  1. पहाड़ी राज्यों के लिए विकास नीति का पैमाना अलग हो।

  2. हिमाचल 2027 तक आत्मनिर्भर, 2031 तक सबसे अमीर राज्य।

  3. ई-गवर्नेंस से पारदर्शिता और जनहितकारी सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

जागरण संवाददाता, धर्मशाला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विकास नीति निर्धारण का पैमाना अलग होना चाहिए। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां और चुनौतियां मैदानी राज्यों से अलग हैं।

इसलिए विकास योजनाओं और नीतियों का निर्धारण करते समय इन परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव हिमाचल प्रदेश ने झेला है, जिससे प्रदेश के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हुई हैं।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को धर्मशाला में ई-गवर्नेंस सुधारों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ई-गवर्नेंस के माध्यम से सरकार की योजनाओं और सेवाओं का लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक पहुंच रहा है। डिजिटल व्यवस्था से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ती है और आम लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवाना आसान होता है।

सामने आ रहे सुधारों के सकारात्मक बदलाव

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार सुधारों के माध्यम से हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि इन सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने वाला केरल भी आज बिजली खरीद रहा है। यह बदलाव ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2031 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आर्थिक संसाधनों का बेहतर उपयोग, प्रशासनिक सुधार और आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल जरूरी है।

हिमाचल को नई पहल अपनाने में मिलेगी मदद

उन्होंने कहा कि ई-गवर्नेंस केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है। राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की ई-गवर्नेंस संबंधी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवाचारों पर चर्चा की जा रही है, जिससे हिमाचल प्रदेश को भी नई पहल अपनाने में मदद मिलेगी।

सम्मेलन के पहले दिन हिमाचल प्रदेश की डिजिटल और जनकल्याणकारी पहलों पर विशेष सत्र आयोजित हुआ है। जिसमें हिम परिवार, सुख आश्रय, विद्या समीक्षा केंद्र, हरित हिमाचल और राजीव गांधी वन संवर्धन योजना को प्रस्तुत किया है। इन पहलों के माध्यम से सरकारी सेवाओं के वितरण, प्रशासनिक दक्षता और जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीक की भूमिका के बारे में बताया गया है।

पहाड़ी राज्यों के विकास का पैमाना अलग तय हो: सुक्खू

क्षेत्रों में किए जा रहे हैं, जिसके परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने इस दौरान डीएआरपीजी की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा सहित देश भर से आए अधिकारियों का देवभूमि में स्वागत किया और आग्रह किया कि जब भी नीति निर्धारण हो तो पहाड़ी राज्यों के लिए अलग पैमाना हो। इससे पहले प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू व अन्य अतिथियों का स्वागत किया।