संवाद सूत्र, ठियोग : सिविल अस्पताल ठियोग व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्टाफ की कमी के कारण बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए ठियोग संघर्ष समिति ने राजनीतिक दलों, समाजसेवी संस्थाओं को राजनीति से ऊपर उठकर एक मंच पर आने का निमंत्रण दिया है। समिति संयोजक सुरेंद्र वर्मा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा ठियोग के सिविल अस्पताल और पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है। उपमंडल की 50 पंचायतों के पीएचसी में विभिन्न पद रिक्त हैं। ददास पंचायत के प्रधान सुरेंद्र, देवरीघाट के प्रधान सुरेश वर्मा, भराणा पंचायत के प्रधान कपिल भारद्वाज व श्टेयां के प्रधान चंदन जोगी ने कहा वर्तमान में पीएचसी को पल्स पोलियो केंद्र बना दिया गया है। पीएचसी में आशा वर्कर्स व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी बिना किसी रजिस्ट्रेशन के सादे कागज पर बीमार व्यक्ति को दवा लिख कर काम कर देते हैं।

चिखड़ पंचायत प्रधान राकेश के अनुसार उनकी पंचायत में सेंटर के बेहतरीन भवन बना हुआ है लेकिन उसमें ताला लगा रहता है। उन्होंने कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए कई बार अधिकारियों से बात की है लेकिन नियुक्ति नहीं की गई। इस कारण जनता को ठियोग जाना पड़ता है। देवरी घाट पंचायत प्रधान सुरेश वर्मा के अनुसार संघर्ष समिति किसी राजनीतिक दल की नहीं है और न ही इसमें राजनीति का कोई काम है। शिमला के अस्पतालों में भीड़ बढ़ने का कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं न मिल पाना है। कपिल के अनुसार मतियाना खंड में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का पद काफी दिनों से खाली चल रहा है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। समिति के सदस्य कपिल भारद्वाज ने ठियोग की जनता से उपमंडल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 11 अप्रैल को एकजुट होने का आह्वान किया है। भारद्वाज ने बताया ठियोग के लोगों ने हमेशा संघर्ष और आपसी एकता के बल पर ही सुविधाओं को छीना है फिर चाहे वह ठियोग कॉलेज, अग्निशामक केंद्र, गुड़िया मामले की सीबीआई जांच का मामला ही क्यों न हो।

Posted By: Jagran

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