राज्य ब्यूरो, शिमला

गर्भावस्था के दौरान होने वाली मातृ मृत्यु को आशा वर्कर रोकेंगी। आशा वर्करों को प्रेरित करने के लिए संस्थागत प्रसव पर 300 रुपये प्रति केस दिया जाएगा। इसी तरह से अपने क्षेत्र में किसी महिला की मौत की सूचना देने पर आशा वर्करों को 200 रुपये प्रति केस के हिसाब से दिए जाएंगे। यही नहीं महिला के गर्भवती होने से बच्चे के 15 साल तक का पूरा डाटा यही वर्कर तैयार करेंगी। दवाई से लेकर वेक्सिन देने का जिम्मा आशा वर्करों को सौंपा गया है। प्रदेश के सभी 72 लाख लोगों का स्वास्थ्य रिपोर्ट कार्ड भी आशा वर्कर तैयार करेंगी। मृत्यु की सूचना देने पर आशा वर्करों को पैसे मिलेंगे, लेकिन इसके माध्यम से महिला की मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। इस तरह आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं को मौत के मुंह में जाने से रोकने का अस्त्र बनेंगी। हिमाचल में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का जिम्मा सरकार ने आशा वर्करों को सौंपा है।

देशभर में मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और सर्वोच्च स्थान हासिल करने के लिए हिमाचल सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश में संस्थागत प्रसव अभी करीब 70 फीसद है। इसकी वजह से भी महिलाओं की मौत का आंकड़ा ज्यादा है। इसे कम करने के लिए संस्थागत प्रसव और 15 से 49 वर्ष की महिलाओं की मृत्यु की सूचना भी आशा वर्करों को देनी होगी। मृत्यु की सूचना देने पर प्रति केस 200 रुपये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दिए जाएंगे। पूरे समाज का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित भी आशा वर्करों के माध्यम से करवाया जाएगा। प्रदेश के लोगों का स्वास्थ्य डाटा, जिसमें नवजात भी शामिल हैं, आशा वर्करों को तैयार करने को कहा है। वह घर जाकर दवाई देने के साथ गर्भवती महिलाओं को डाटा तैयार करेंगी। उन्हें अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंचाएंगी, जिसके लिए अलग से कमीशन मिलेगा।

7739 आशा वर्करों को सौंपा जिम्मा

स्वास्थ्य डाटा कार्ड तैयार करने का जिम्मा प्रदेश की 7739 आशा वर्करों को सौंपा गया है। उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से 2000 और प्रदेश सरकार की तरफ से 1250 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके अलावा बैठक, टीकाकरण व अन्य कार्यो के लिए कमीशन दी जा रही है।

प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में आशा वर्करों की भूमिका अहम होगी। इसके अलावा उनके क्षेत्र में किसी महिला की मृत्यु होने की सूचना देने पर उन्हें प्रति केस के आधार पर कमीशन दी जाएगी। इससे यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि महिला की मौत किन कारणों से हुई।

मनमोहन शर्मा, परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिप्र

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