राज्य ब्यूरो, शिमला : विकास के मामले में देशभर के अग्रणी राज्यों के साथ कदमताल करने वाला हिमाचल अब प्राकृतिक खेती की नई सोच से सभी को राह दिखाएगा। पहाड़ का शून्य लागत प्राकृतिक कृषि मॉडल पूरे देश में लागू होगा। इस पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने खुशी जताई है। यह इनके दिमाग की उपज माना जाता है। देवव्रत ने केंद्र सरकार द्वारा बजट में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि की चर्चा कर इसे देश में लागू करने के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के लिए गर्व की बात है। यहां प्रदेश सरकार पहले से ही प्राकृतिक कृषि पर कार्य कर रही है।

राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने गत वर्ष करीब पौने तीन हजार किसानों को इस कृषि पद्धति के तहत लाया। इस वर्ष 50 हजार किसानों को इसके दायरे में लाया जाएगा। इस कृषि पद्धति के जनक पद्मश्री सुभाष पालेकर के राज्य में चार बड़े शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। प्रत्येक में 1000 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह है पद्धति

यह ऐसी कृषि पद्धति है जो जमीन की उर्वरा शक्ति को तो बढ़ाती ही है, पर्यावरण संरक्षण के लिए भी उपयोगी है। पानी की खपत कम होती है। इससे किसानों की आय कई गुणा बढ़ जाती है। इससे देसी गाय का संव‌र्द्धन होगा और खाद्य पदार्थ जहरमुक्त होंगे। हाल ही में बागवानी विश्वविद्यालय नौणी में लगे शिविर में देश के कुछ महत्वपूर्ण व्यापारियों ने प्रस्ताव दिया है कि हिमाचल में तैयार प्राकृतिक उत्पाद को डेढ़ गुणा दाम पर खरीदेंगे। पीएम का संकल्प में पूरा सहयोग

राज्यपाल ने कहा कि देश में इस कृषि पद्धति को लागू करने के प्रधानमंत्री के संकल्प में राज्य की ओर से पूर्ण सहयोग रहेगा। 2022 तक प्रदेश को पूर्ण रूप से प्राकृतिक कृषि राज्य बना दिया जाएगा। यह सेब की फसल के लिए भी कारगर है। अब देश के कृषि वैज्ञानिक भी इस दिशा में सोचेंगे और इस पद्धति पर शोध की दिशा में आगे बढ़ेंगे। पूरे राज्यों के राज्यपालों को जोड़ेंगे

अन्य राज्यों के राज्यपालों को भी इस कृषि पद्धति के प्रचार के लिए साथ जोड़ा जाएगा। आचार्य की हाल ही मेंकेंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से भेंट हुई थी। उन्होंने कृषि मंत्रालय के अन्य अधिकारियों के साथ गुरुकुल कुरुक्षेत्र के कृषि फार्म का दौरा करने का आश्वास दिया है।

Posted By: Jagran

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