गोबर से बनेगी गैस और कचरे से बंपर कमाई, हिमाचल में हरित ऊर्जा का नया मॉडल तैयार; केंद्र से 500 करोड़ मांगेगी सरकार
हिमाचल प्रदेश सरकार गौशालाओं, डेरियों और बागवानी कचरे से हरित ऊर्जा उत्पादन के लिए केंद्र के 3000 करोड़ रुपये के ...और पढ़ें

हिमाचल में हरित ऊर्जा का नया मॉडल तैयार (फाइल फोटो)
HighLights
केंद्र के सीबीजी पैकेज में हिस्सेदारी के लिए प्रस्ताव तैयार।
गौशाला, डेयरी, बागवानी कचरे से हरित ऊर्जा उत्पादन पर जोर।
ग्रामीण आर्थिकी को नई दिशा, सीबीजी नीति लागू करना अनिवार्य।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल में गौशालाओं, डेरियों और बागवानी कचरे से अब हरित ऊर्जा बनाने के साथ ग्रामीण आर्थिकी को भी नई दिशा देने की तैयारी है। केंद्र सरकार के कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) सेक्टर के लिए घोषित 3000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज में हिस्सेदारी के लिए प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सरकार की ओर से 300 से 500 करोड़ रुपये तक का प्रस्ताव केंद्र को भेजे जाने की संभावना है। इस संबंध में राज्य सचिवालय से पत्र ग्रामीण विकास निदेशालय पहुंच गया है।
केंद्र ने गोबर, पराली और जैविक कचरे से सीबीजी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए यह पैकेज घोषित किया है। सहायता राशि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दी जाएगी।
हिमाचल को सभी प्रमाणपत्रों के साथ अपना दावा पहली दिसंबर 2026 तक मंत्रालय को भेजना होगा। पैकेज का लाभ लेने के लिए हिमाचल को अपनी सीबीजी नीति तत्काल अधिसूचित करनी होगी।
केंद्र ने छह अप्रैल को मॉडल नीति राज्यों को भेजी थी, जिसे कुछ राज्य लागू भी कर चुके हैं। प्रदेश में सिंगल विंडो क्लीयरेंस, प्लांट के लिए भूमि की सुविधा और गोबर व जैविक खाद को एकत्रित करने का एक मजबूत तंत्र (मैकेनिज्म) विकसित करना होगा।
प्रदेश के लिए इसलिए है अहम
हिमाचल में करीब 19 लाख मवेशी हैं। सोलन, कांगड़ा और ऊना में बड़े डेरी क्लस्टर हैं, जबकि शिमला और कुल्लू में सेब व अन्य फल-सब्जियों का कचरा बड़ी मात्रा में उपलब्ध होता है।
फिलहाल प्रदेश में सीबीजी का कोई बड़ा प्लांट नहीं है। यदि सरकार समय पर नीति लागू कर दावा पेश करती है, तो बीबीएन, टाहलीवाल और परवाणू जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े सीबीजी प्लांट लगाने की संभावना बन सकती है।
