राज्य ब्यूरो, शिमला : शिक्षा विभाग द्वारा मुफ्त वर्दी के टेंडर का सप्लाई आर्डर नहीं दिया गया है। इस कारण इस साल स्कूलों में विद्यार्थियों को अभी तक वर्दी नहीं मिल पाई है। खाद्य एवं आपूर्ति निगम द्वारा टेंडर खोलने के बाद सप्लाई आर्डर की मंजूरी के लिए इसे शिक्षा विभाग के पास भेजा गया है।

शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में आठ लाख बच्चों को दी जाने वाली मुफ्त वर्दी का सप्लाई आर्डर न देकर इस मामले को लटकाया है। शिक्षा विभाग के पास लंबे समय से यह फाइल पड़ी है जिसे मंजूरी नहीं दी गई है। खाद्य एवं आपूर्ति निगम ने तीन वर्ष के लिए 24 लाख वर्दियां सप्लाई करने के लिए टेंडर कर मंजूरी के लिए शिक्षा विभाग को भेज दिया था। प्रदेश में शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों को खुले आठ महीने होने जा रहे हैं। इन स्कूलों में शैक्षणिक सत्र अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है लेकिन विद्यार्थियों को नि:शुल्क वर्दी अब तक नहीं मिली है। टेंडर की शर्तो के अनुसार कंपनी को सप्लाई आर्डर देने के 60 दिन बाद वर्दी की सप्लाई शुरू होगी। नि:शुल्क वर्दी देने का क्या लाभ है जब बच्चों को अपने पैसों से ही वर्दी खरीदनी पड़ रही है। वर्दी के टेंडर में छह कंपनियों ने लिया हिस्सा

खाद्य एवं आपूर्ति निगम द्वारा किए गए वर्दी के टेंडर में छह कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी। वर्दी का टेंडर इस वर्ष सहित अगले दो वर्ष के लिए किया गया है। सरकारी स्कूलों के आठ लाख छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क वर्दी देने के लिए छह श्रेणी में टेंडर किए गए। इसमें पहली से पांचवीं कक्षा, छठी से दसवीं तक और जमा एक व जमा दो कक्षा के लड़के और लड़कियों की श्रेणी शामिल है। वर्दी के लिए सबसे कम दाम महाराष्ट्र की मस्तलाल इंडस्ट्री ने दिया है। अन्य पांच कंपनियों में आरएसडब्ल्यू नोएडा, सुनील इंडस्ट्री मुंबई, बंासवाड़ा सेंटेक्स राजस्थान, जेबीटीएल भिवानी हरियाणा और नाहर इंडस्ट्रियल एंटरप्राइजिज महाराष्ट्र शामिल हैं। सत्र के दौरान वर्दी न मिले तो क्या लाभ

मेरा बेटा सरकारी स्कूल में पढ़ता है। अभी तक इस साल की नि:शुल्क वर्दी नहीं दी गई है। बेटे को स्कूल भेजने के लिए बाजार से वर्दी खरीदी है। जब सत्र के दौरान वर्दी न मिले तो इसका क्या लाभ है। शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पूर्व वर्दी मिल जानी चाहिए ताकि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्चने का लाभ मिल सके।

सुरेश नेगी, अभिभावक नहीं आई सप्लाई आर्डर की फाइल

वर्दी के टेंडर के सप्लाई आर्डर की फाइल मेरे पास नहीं आई है। फाइल आने के बाद इसे मंजूरी दी जाएगी।

अरुण शर्मा, सचिव, शिक्षा विभाग

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