शिमला, राज्य ब्यूरो। आम जनता में प्रभावशाली दिखने के लिए विधायक अपने वाहनों पर झंडी लगाना चाहते थे, लेकिन विधानसभा कार्यालय ने इससे इनकार कर दिया है। विधानसभा सचिवालय के नियमों में प्रावधान नहीं है कि विधानसभा के झंडे को विधायक अपने वाहनों पर लगा सकें। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से विधानसभा को प्रस्ताव भेजा था, जिसमें कहा गया था कि विधायक चाहते हैं कि उनके वाहनों पर भी झंडी लगाने की व्यवस्था हो।

जीएडी के प्रस्ताव को विधानसभा सचिवालय ने यह कहते हुए नकार दिया कि फ्लैग कोड में कहीं भी व्यवस्था नहीं है कि विधानसभा का झंडा विधायकों के वाहन पर लगाया जा सके। 13वीं विधानसभा में चुनकर आए विधायक वाहनों पर पहचान दर्शाने वाला प्रतीक चिह्न चाहते हैं। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने विधायकों के वाहनों पर लगने वाली लाल बत्तियों और राष्ट्र ध्वज को संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ करार दिया था। 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने वाहन से लाल बत्ती उतार दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने लाल बत्तियों को स्टेटस सिंबल माना था जो संविधान के खिलाफ है। जनप्रतिनिधि भी आम आदमी की तरह हैं और उन्हें उनकी तरह रहना चाहिए।

जानें, विधायक क्यों चाहते हैं पहचान
मानसून सत्र के दौरान भाजपा-कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री से मिले थे। मांग की थी कि उन्हें पहचान दी जाए। वाहनों पर झंडा लगाने का रास्ता निकाला जाए। तर्क दिया गया कि जन कार्यक्रमों में पहुंचने के लिए सड़क पर जाम रहता है। कई बार लोग विधायक को पहचानते नहीं हैं और दु‌र्व्यवहार होता है। ऐसे में विधानसभा का झंडा लगाने की अनुमति दी जाए।

दो बार उठ चुका है मामला
बजट सत्र में विधायकों ने अलग पहचान देने का मामला उठाया था। मुख्यमंत्री ने सत्र के दौरान ही मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाकर कोई रास्ता निकालने के लिए कहा था। तब विधायक ये चाहते थे कि उनके साथ सुरक्षा के लिए रहने वाला कांस्टेबल वर्दी में हो। उसे वायरलेस यंत्र उपलब्ध करवाया जाए।

मानसून सत्र के दौरान विधायकों ने डीसी-एसपी की तर्ज पर झंडी की मांग कर डाली। विधायक चाहते थे कि जब डीसी-एसपी के सरकारी वाहन पर झंडा लग सकता है तो उनके वाहन पर झंडे की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।

विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष लगा सकते हैं झंडा
विधानसभा के झंडे का इस्तेमाल विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के वाहनों पर किया जा सकता है। दोनों संवैधानिक दर्जा प्राप्त हैं। 19 अप्रैल 2017 को सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और झंडा लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जबकि देश में संवैधानिक पदों पर बैठे पांच लोगों को यह अधिकार प्राप्त है। इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा अध्यक्ष शामिल हैं। इसी तरह राज्यों के स्तर पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहनों पर राष्ट्र ध्वज लग सकता है।