जागरण संवाददाता, शिमला : कृषि विषयवाद विशेषज्ञ करयाली बसंतपुर में जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इसमें 26 पंचायतों से करीब 50 किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती की जानकारी दी गई। कृषि निदेशालय से पर्यवेक्षक डॉ. एसआर कश्यप ने किसानों को खेतों में कीटनाशक एवं खाद के स्थान पर घरेलू स्तर पर बनाए गई खाद एवं स्प्रे का इस्तेमाल करने के तौर तरीकों की जानकारी प्रदान की। डॉ. एसआर कश्यप ने बताया कि रासायनिक युक्त खादों एवं दवाओं के अधिक प्रयोग से खेतों से बाजारों तक पंहुचने वाले उत्पाद हानिकारक हो गए हैं। सब्जियों, फलों, दूध एवं विभिन्न प्रकार के खाद्य उत्पादों में तय मानकों से अधिक जहर की मात्रा पाई जा रही है, जोकि मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होने के साथ उपजाऊ मिट्टी को भी बंजर बना रहे हैं। किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है। शून्य लागत खेती का मकसद कंपनियों की लूट पर नियंत्रण करना भी है। शून्य लागत खेती का मुख्य ध्येय गाव का पैसा गाव और शहर का पैसा भी गाव में पंहुचे है। कृषि विकास अधिकारी बसंतपुर डॉ. डीपी शर्मा ने कहा कि खेती को गाय के गोबर एवं मूत्र से आसानी से कम लागत में किया जा सकता है। इस अवसर पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण के खंड तकनीकी प्रबंधक डॉ. संदीप, सहायक खंड तकनीकी प्रबंधक रोकी कुमार, कृषि प्रसार अधिकारी यशपाल वर्मा आदि मौजूद रहे।

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