रामेश्वरी ठाकुर, शिमला

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) शिमला में डॉक्टरों ने कोरोना मरीजों व संदिग्धों को जांचने व इलाज के लिए फेस शील्ड तैयार की है। यह शील्ड डॉक्टरों को संक्रमण से बचाएगी। अस्पतालों में सप्लाई की गई व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट में उपलब्ध चश्मे भी संक्रमण से बचाते हैं लेकिन उनमें साधारण लैंस होता है। जिन डॉक्टरों की नजर कमजोर है, वे इन चश्मों के साथ अधिक समय पर काम नहीं कर पा रहे हैं।

डॉक्टरों ने इस समस्या का समाधान तलाशा और दो दिन में फेस शील्ड तैयार की। यह फेस शील्ड पहनकर डॉक्टर मरीज का इलाज आसानी से कर सकते हैं। रिपन अस्पताल शिमला में तैनात विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन ने बताया कि आइजीएमसी में दो दिन इंटेसिव केयर यूनिट (आइसीयू) में ड्यूटी देने के लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जिसमें परेशानियों पर भी चर्चा हुई। डॉक्टरों की दिक्कत दूर करने के लिए फेस शील्ड तैयार की गई। जल्द ही शिमला में कोरोना मरीजों व संदिग्धों को जांचने के लिए यह शील्ड पहनी जाएगी। सैंपल लेने वालों व डॉक्टरों को पीपीई किट के साथ यह फेस शील्ड भी दी जाएगी। पीपीई किट्स में दिए गए चश्मे की जगह नया उपकरण इस्तेमाल किया जाएगा। क्यों जरूरी थी फेस शील्ड

कोरोना वायरस आंख, कान, नाक व मुंह के जरिये शरीर में प्रवेश कर सकता है। कोरोना के संदिग्धों के टेस्ट लेने के समय उनके मुंह में हाथ डालकर थूक का टेस्ट लेना होता है। ऐसे में थूक के कण सामने खड़े डॉक्टर को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए सैंपल लेने वाले डॉक्टरों को चाहिए कि पूरे शरीर के साथ इन चारों अंगों का बचाव भी किया जाए।

डॉक्टरों का कहना है कि हालांकि सरकार की ओर से दी गई पीपीई किट की गुणवत्ता सही है लेकिन उसमें दिए गए चश्मे के साथ डॉक्टर अधिक समय तक काम नहीं कर पाएंगे। इससे परेशानी आ रही थी। डॉक्टरों को आइसोलेशन व आइसीयू में कई बार 10 से 12 घंटे की ड्यूटी देनी होती है। ऐसे में साधारण चश्मे के साथ काम करना अधिकांश डॉक्टरों के लिए संभव नहीं है। नई तैयार की गई फेस शील्ड डॉक्टरों के मुंह को पूरी तरह सुरक्षा देगी। कैसे तैयार की फेस शील्ड

डॉक्टरों के अनुसार फेस शील्ड तैयार करने के लिए स्टेशनरी दुकान से लाए गए ट्रांसपेरेंट पेपर का इस्तेमाल किया गया है। इसमें इलास्टिक जोड़कर पहनने के लिए तैयार किया गया। इसे पहनने के बाद घुटन महसूस नहीं होगी। सांस लेने के लिए इसके किनारों में जगह रखी गई है ताकि पीपीई किट के साथ समायोजित कर घुटन होने की आशंका न रहे। फेस शील्ड तैयार करने के लिए मामूली खर्च आता है।

Posted By: Jagran

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