राज्य ब्यूरो, शिमला : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि जिन लोगों ने आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाकर कड़ा संघर्ष किया उन्हें हमेशा याद रखा जाना चाहिए। यह बात आज मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आपातकाल के दौरान जेल गए व्यक्तियों के दिए योगदान को याद करने के लिए राज्य सरकार के रविवार को आयोजित लोकतंत्र प्रहरी सम्मान समारोह में कही। उन्होंने कहा कि आम तौर पर लोग कठिन समय को भूल जाते हैं, लेकिन आपातकाल के समय को कभी नहीं भूला जा सकता। आपातकाल से युवाओं और भावी पीढ़ी को परिचित होना चाहिए। इस अवसर पर 81 लोकतंत्र प्रहरियों में से 66 को सम्मानित किया गया।

जयराम ने कहा कि आपातकाल के दौरान जिन लोगों को जेलों में बंद किया था उन्हें सम्मानित करने के लिए हिमाचल सरकार ने 2019 में लोकतंत्र प्रहरी सम्मान योजना शुरू की। शनिवार को ही सरकार ने विधानसभा में हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी बिल-2021 पास किया है। इससे अब आपातकाल के दौरान जो लोग जेल गए थे उन्हें सम्मान राशि मिल सकेगी। लोकतंत्र प्रहरी समिति के अध्यक्ष एवं शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि आपातकाल का समय लोकतंत्र के इतिहास में काला अध्याय है। आपातकाल की पृष्ठभूमि को उजागर कर उस दौरान संघ व उससे संबंधित विभिन्न संगठनों के किए कार्यों की जानकारी दी। समिति सदस्य प्रवीण शर्मा ने आपातकाल के दौरान जेल में बिताए अपने कठिन दिनों के अनुभव साझा किए। राष्ट्रीय गौरव समिति के सचिव सुभाष गुप्त ने अपने विचार रखे।

इंदिरा गांधी ने लगाया था आपातकाल

25 जून, 1975 की आधी रात को आपातकाल लगाया गया जो 21 मार्च, 1977 तक 21 माह तक रहा। इस घटना को 45 वर्ष बीत गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 25 जनवरी, 2021 को राज्य ने भी अपने पूर्ण राज्यत्व के 50 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और पूर्ण राज्यत्व की स्वर्ण जयंती को यादगार बनाने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश में 51 कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। सरकार ने बढ़ाई सम्मान राशि

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के तहत 15 दिन से कम जेल काटने वालों को आठ हजार रुपये मासिक सम्मान धनराशि मिलेगी। उससे अधिक समय तक जेल में रहने वालों को 12 हजार और स्वर्ग सिधार चुके लोगों की पत्नी को भी 12 हजार रुपये सम्मान राशि देने का निर्णय लिया है।

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