शिमला, जेएनएन। राजधानी शिमला के आइस स्केटिंग रिंक में अब अप्राकृतिक तरीके से बर्फ जमाने और रिंक की हालत सुधारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मार्च में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसके लिए वल्र्ड बैंक पैसे देगा। करीब 22 करोड़ की राशि इसके लिए स्वीकृत हो चुकी है। आइस स्केटिंग शिमला के प्रसिद्ध खेलों में से एक है। स्केटिंग का लुत्फ उठाने के लिए बच्चों को हर साल के नौ माह तक इंतजार करना पड़ता है। लेकिन अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। इसके लिए मौसम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

आधुनिक तकनीक से बर्फ जमाने पर पूरा साल स्र्केंटग का लुत्फ उठाया जा सकेगा। रिंक में बर्फ जमाने के लिए रेफ्रिजरेशन प्लांट स्थापित होगा। इसके लिए ग्लोबल टेंडर होंगे, जिसकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

शिमला में स्कूली बच्चों को सर्दी की छुट्टियां होने के बाद स्र्केंटग शुरू होने का बेसब्री से इंतजार रहता है। स्‍केटिंग प्रोग्राम में दो सेशन होते हैं। इसमें हर साल करीब 200 से 250 बच्चे स्केटिंग करने आते हैं।आइस स्केटिंग क्लब के कोषाध्यक्ष पंकज प्रभाकर का कहना है कि दिसंबर तक रिंक में प्राकृतिक तरीके से बर्फ जमनी शुरू हो जाएगी, जिसके लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। मार्च से आर्टिफिशियल तरीके से बर्फ जमाने का कार्य भी शुरू होगा। 

इस साल मनाई जाएगी रिंक की गोल्डन जुबली

आइस स्केटिंग रिंक एशिया का एकमात्र्र रिंक है जहां हर साल जिमखाना और कार्निवल की प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। इस बार भी मौसम अनुकूल होने के चलते रिंक में दिसंबर के अंतिम दिनों में प्रतियोगिताएं करवाने की तैयारी है। इस साल रिंक के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में इन प्रतियोगिताओं में नए कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है।  

पहले होता था यहां टेनिस कोर्ट

आइस स्केटिंग रिंक 1920 में बनकर तैयार हुआ था। रिंक का निर्माण ब्रिटिश मूल के ब्र्लैंसग्टन ने किया था। यहां पहले टेनिस कोर्ट हुआ करता था। लेकिन सर्दियों में बर्फ जमने के कारण इसमें स्र्केंटग शुरू करवा दी गई। तभी से सर्दियों की छुट्टी के दौरान बच्चे आइस स्‍केटिंग का मजा लेते हैं। शिमला का यह रिंक एशिया के सबसे पुराने ओपन एयर रिंक में से एक है। 

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Posted By: Babita kashyap

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