शिमला, रमेश सिंगटा। हिमाचल प्रदेश में नासूर बनते जा रहे नशे पर अब ड्रोन कैमरों के जरिए वार किया जाएगा। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने तीन ड्रोन कैमरे खरीदने के लिए स्वीकृति दे दी है। इनके माध्यम से भांग और पोस्त की दुर्गम इलाकों में लहलहाने वाली फसलों की तस्वीरें खींची जा सकेंगी। इनके आधार पर राज्य पुलिस नष्ट करने का ऑपरेशन चलाएगी। खासतौर पर कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर के ऐसे इलाकों पर नजर रहेगी, जहां तक खाकी के हाथ नहीं पहुंच पाते हैं।

इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा था। कई तरह के उपकरणों की खरीद के लिए फंड मांगा था। मंत्रालय ने इसकी स्वीकृति दे दी है। इस संबंध में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के उप महानिदेशक (मुख्यालय) ने राज्य सरकार को स्वीकृति पत्र भेजा है। इसकी प्रतिलिपि मुख्य सचिव, डीजीपी को दी गई है। अब जल्द इसकी खरीद होगी। जैसे ही कैमरे उपलब्ध होंगे, नारकोटिक्स ड्रग के खिलाफ जंग और तेज हो जाएगी। इस खरीद पर डेढ़ लाख खर्च होंगे। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो फिर प्रदेश पुलिस और खरीद करेगी।  

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इस साल कितने मामले पकड़े 

हिमाचल में नारकोटिक्स क्राइम के मामले में हर साल वृद्धि हो रही है। 10 साल में 6261 मामले दर्ज किए गए। तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चला है कि इनमें हर साल इजाफा ही हो रहा है। तस्करी में भारतीयों के अलावा विदेशी मूल के नागरिक भी पहाड़ी राज्य में बड़ी तादाद में सक्रिय हैं। एक दशक के भीतर तस्करी के आरोप में 6175 भारतीय और 124 विदेशी पकड़े गए। कुल दर्ज मामलों में से 35 में पुलिस ने केंसलेंशन रिपोर्ट तैयार की। 347 मामले ऐसे रहे, जिनमें पैंडिंग इंवेस्टीगेशन रही। 5563 केस अदालतों में भेजे गए। इनमें आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई। 744 केसों में सजा हुई, जबकि 1762 केस कोर्ट में साबित नहीं हो पाए। इन सभी मामलों में सजा की औसत दर 29.68 फीसद रही।

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Posted By: Babita kashyap

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