जागरण संवाददाता, शिमला : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने क्षेत्रीय अस्पताल रिपन में डिजिटल एक्सरे मशीन स्थापित करने की घोषणा 25 दिसंबर 2017 को क्रिसमस के मौके पर की थी। लेकिन अफसरशाही ने इस घोषणा को पीपीपी मोड पर देने की तैयारी कर ली है। अगर पीपीपी मोड पर मशीन लगती है तो जनता को अधिक पैसे देने पड़ेंगे, लेकिन बड़ी बात तो यह है कि पदभार संभालने के बाद मुख्यमंत्री की पहली ही घोषणा को पूरा करने के लिए बजट का रोना रोया जा रहा है।

पहले लंबे समय तक तो स्वास्थ्य विभाग ने इस घोषणा पर कार्य ही शुरू नहीं किया। बल्कि मुख्यमंत्री ने घोषणा को पूरा करने के लिए 100 दिन का टारगेट सेट किया था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी अभी तक डिजिटल एक्सरे मशीन स्थापित नहीं की है। अभी भी स्वास्थ्य विभाग तिथि तय नहीं कर पा रहा कि किस दिन मशीन स्थापित होगी। मिली जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत एक कंपनी के माध्यम से कंप्यूटरीकृत रेडियोग्राफी सिस्टम स्थापित कर रही है। अफसरशाही इसी कंपनी के माध्यम से रिपन अस्पताल में एक्सरे मशीन स्थापित करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक एक्सरे मशीन स्थापित करने के लिए अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहती है। बल्कि कंप्यूटरीकृत रेडियोग्राफी सिस्टम के खर्च में अतिरिक्त एक्सरे मशीन लगवाने का प्रयास कर रहे हैं। अभी ओर कितना इंतजार करना होगा। इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते है। लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा की पहली घोषणा को लेकर अफसरशाही की सक्रियता की पोल जरूर खुलती नजर आ रही है।

पुरानी एक्सरे मशीन रामभरोसे

रिपन अस्पताल नए भवन में चल रहा है। यहां जो एक्सरे मशीन लगी है वह पूरी तरह कंडम हो चुकी है। अब तो कंपनियां उक्त मशीन की रिपेयर के लिए आने से इन्कार कर देती हैं। रिपन अस्पताल में रोजाना 1300 से अधिक मरीजों को ओपीडी लगती है। ऐसे में एक्सरे जैसे ही अहम सुविधा बेहतरीन न होने के कारण निजी लैब में महंगे दाम पर करवाने पड़ रहे हैं।

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सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जल्द ही एक्सरे मशीन स्थापित हो जाएगी। हमारे स्तर की सारी औपचारिकताएं पूरी है। मशीन किस मोड पर स्थापित होगी इसके बारे विभाग ही बता सकता है।

-डॉ. नीरज मित्तल सीएमओ।

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एनएचएम के माध्यम से एक्सरे मशीन लगनी है। प्रदेश के 20 अस्पतालों में कंप्यूटरीकृत रेडियोग्राफी सीआर लग रही है। उसी कंपनी से बातचीत हुई थी। रिपन में भी सीआर के साथ डिजिटल एक्सरे मशीन बिना किसी अतिरिक्त खर्च के स्थापित करने की बातचीत चल रही थी। एनएचएम ही इस बारे में मुख्य तौर पर कार्य कर रहा है। जल्द ही अस्पताल में मशीन स्थापित कर दी जाएगी।

-डॉ. निपुण जिंदल, विशेष सचिव स्वास्थ्य।

Posted By: Jagran

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