न विक्रमादित्य और ना ही प्रतिभा सिंह... वीरभद्र के गढ़ में दिखी CM सुक्खू की लोकप्रियता; देर रात तक सुनी लोगों की समस्या
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे पर उमड़ी भीड़ ने उनकी लोकप्रियता पर नई चर्चा छेड़ दी है, जो ...और पढ़ें
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वीरभद्र के गढ़ में लोगों की समस्या सुनते सीएम सुक्खू। फोटो जागरण
HighLights
मुख्यमंत्री सुक्खू के रोहड़ू कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़।
सुक्खू ने लोगों की समस्याएं सुनीं और स्थानीय नाटी डाली।
वीरभद्र सिंह के गढ़ में सुक्खू की नई पहचान की चर्चा।
अनिल ठाकुर, शिमला। कभी पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के मजबूत राजनीतिक गढ़ रहे रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने उनकी लोकप्रियता को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में न लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह थे और न कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री को सुनने और उनसे मिलने पहुंचे।
विक्रमादित्य सिंह विदेश दौरे पर हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। मुख्यमंत्री ने भी लोगों के बीच देर तक रहकर उनकी समस्याएं सुनीं और स्थानीय संस्कृति से जुड़कर नाटी डाली।
वीरभद्र सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि रहे रोहड़ू में सुक्खू का यह प्रवास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्र की राजनीति में वीरभद्र परिवार का लंबे समय तक प्रभाव रहा है। वीरभद्र सिंह रोहड़ू से लगातार पांच बार विधायक रहे। उन्होंने 1990, 1993, 1998, 2003 और 2007 में यहां से जीत दर्ज की। बाद में परिसीमन के कारण सीट आरक्षित होने पर उन्होंने शिमला ग्रामीण से चुनाव लड़ा।
नाटी गुनगुनाई तो आत्मीय हो गया माहौल
मुख्यमंत्री सुक्खू ने रोहड़ू के लोगों के साथ अपने संवाद को राजनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा। देर रात तक लोगों के बीच रहे और उनकी समस्याएं सुनीं। कार्यक्रम में जब उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ नाटी डाली और ‘रोहड़ू जाणा मेरी आमिएं’ गुनगुनाया तो माहौल पूरी तरह आत्मीय हो गया। मुख्यमंत्री के इस अंदाज का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर भी खूब प्रसारित हो रहा है।
रोहड़ू से विधायक मोहन लाल ब्राक्टा को सुक्खू सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया था। ब्राक्टा को वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में वीरभद्र के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी को उनकी स्वीकार्यता और लोकप्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है।
यह रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री का दूसरा बड़ा प्रवास है। इससे पहले वह सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के तहत डोडरा-क्वार पहुंचे थे। लगातार दूसरे बड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की मौजूदगी और लोगों की भागीदारी ने रोहड़ू को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
वीरभद्र के गढ़ में सुक्खू की अलग पहचान की चर्चा
रोहड़ू में उमड़ी भीड़ के बाद कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि मुख्यमंत्री सुक्खू इस पारंपरिक कांग्रेस गढ़ में अपनी अलग राजनीतिक पहचान और जन स्वीकार्यता बनाने में सफल हो रहे हैं। हालांकि किसी एक कार्यक्रम की भीड़ को लोकप्रियता का अंतिम पैमाना नहीं माना जा सकता, लेकिन मुख्यमंत्री के सीधे संवाद और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने राजनीतिक चर्चा को जरूर हवा दी है।
रोहड़ू से पांच बार जीते थे वीरभद्र
वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू से 1990, 1993, 1998, 2003 और 2007 के विधानसभा चुनाव जीते। 2012 में परिसीमन के बाद उन्होंने शिमला ग्रामीण से चुनाव लड़ा। रोहड़ू में कांग्रेस की पकड़ बाद में मोहन लाल ब्राक्टा ने कायम रखी। 2012 में ब्राक्टा ने यहां बड़ी जीत दर्ज की और 2022 में भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता।
