राज्य ब्यूरो, शिमला : राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरबाड़ा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आग्रह किया है कि विद्युत बोर्ड के विघटन की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर बोर्ड के कर्मचारी आंदोलन के लिए तैयार हैं। विद्युत बोर्ड से ट्रांसमिशन विंग को अलग करने की सोचने वालों को सबक सिखाया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड का विघटन करना नौकरशाही की चाल है। ऐसा करने पर बोर्ड की संपत्ति छह हजार करोड़ से कम होकर दो हजार करोड़ रुपये रह जाएगी। इससे 23 हजार पेंशनरों की सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। ऐसा करना पूर्व धूमल सरकार के कर्मचारियों के साथ हुए समझौते का उल्लंघन होगा। इससे ट्रासमिशन का काम प्रभावित होगा क्योंकि 66 केवी तथा इससे ऊपर के सब स्टेशन ट्रासमिशन के पास चले जाएंगे। वहीं, 33 केवी तक के सब स्टेशन बोर्ड के पास रहेंगे। इससे बिजली के वितरण में फाल्ट आने पर परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्होने आरोप लगाया कि पूर्व में लिए गए करीब 1900 करोड़ रुपये के कर्ज पर पहले काम नहीं हो पाया। इसका ठीकरा अफसरशाही विद्युत बोर्ड पर फोड़ रही है। किसी भी स्तर पर ट्रांसमिशन विघटन की प्रक्रिया सहन नहीं होगी और कर्मचारी आर-पार की लड़ाई लडे़ंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि बिजली बोर्ड से 1400 करोड़ की संपत्ति यानी ट्रासमिशन को अलग किया गया तो पूरे प्रदेश में ब्लैकआउट (बिजली बंद) कर दिया जाएगा। बोर्ड के पास रहेंगे 33 केवी तक के सब स्टेशन

यदि ट्रासशिमन विंग के हस्तातरण का मामला सिरे चढ़ता है तो 66 केवी से ऊपर के सभी सब स्टेशन और बड़ी ट्रासमिशन लाइनें राज्य विद्युत बोर्ड के पास नहीं रहेंगी। ऐसे में 1300 कर्मचारी ट्रांसमिशन विंग के पास चले जाएंगे। बोर्ड के पास केवल 33 केवी तक के सब स्टेशन रह जाएंगे। इसी स्तर पर ट्रासमिशन लाइनें सीमित रह जाएंगी।

पंजाब में भी अलग है ट्रासमिशन

सरकार का तर्क है कि अन्य राज्यों विशेषकर पंजाब में भी ट्रासमिशन अलग है। ट्रासमिशन को अलग न करने से कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। ट्रासमिशन के अलग होने पर कर्मचारियों को वेतन, पदोन्नति और पेंशन जैसे लाभ पहले की तरह मिलते रहेंगे। एक्ट के अनुसार ऐसा करना अनिवार्य है। कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा असर

राज्य विद्युत बोर्ड से ट्रांसमिशन विंग अलग होने से किसी भी कर्मचारी को कोई असर नहीं होगा। पेंशन व दूसरे वित्तीय लाभ पहले की तरह मिलते रहेंगे। एक्ट के अनुसार एक संस्था दो काम नहीं कर सकती है। असल मकसद बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाना है। इसी तरह की व्यवस्था अन्य राज्यों में की गई है।

तरुण कपूर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (ऊर्जा)

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