शिमला, जागरण टीम। जीत हो तो ऐसी कि उसकी धूम दूर तक महसूस हो। नाचन में भाजपा के विनोद के पक्ष में मतदाताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी लाल सिंह के खिलाफ ऐसा कौशल दिखाया कि जीत के अंतर का रिकॉर्ड बन गया। इस चुनाव में सर्वाधिक अंतर नाचन क्षेत्र में ही दर्ज किया गया है। सत्ता विरोधी रुझान में तो ये अंतर दिखते ही हैं लेकिन मजे की बात यह है कि ऐसे क्षेत्रों में भी जीत का अंतर बढ़ा है जहां विधायक पुराना था। यानी प्रत्याशी बेशक पुराना था लेकिन उसके प्रति कोई नकारात्मक धारणा नहीं थी।

 

दिलचस्प यह भी है कि ऐसे तीन क्षेत्रों में पहले भी भाजपा के और यही विधायक थे। नाचन से विनोद के बाद, सराज से जयराम ठाकुर और धर्मपुर से महेंद्र ठाकुर। हालांकि पिछली बार कांग्रेस से थे लेकिन अनिल शर्मा इस बार भाजपा की टिकट से भी जीते। ये लोग लगातार जीत रहे हैं और जीत का अंतर भी बढ़ा रहे हैं।

इसके अलावा सब लोग सत्ता विरोधी सैलाब में बहे हैं। शांता कुमार की राजनीति की गंगोत्री यानी सुलह में पिछली बार भाजपा प्रत्याशी विपिन पर मार करने वाले जगजीवन पाल पर विपिन ने मार की है।

 

बैजनाथ में किशोरी लाल पर मुल्खराज प्रेमी के प्रति लोगों का प्रेम भारी पड़ा। पांवटा साहिब में किरणेश ने न केवल जंग हारी बल्कि चौधरी सुखराम से मतांतर का दुख भी पाया। बल्ह में इंद्र सिंह गांधी की आंधी ने प्रकाश चौधरी की जीत का प्रकाश खत्म कर दिया। जयसिंहपुर में पिछले चुनाव में यादवेंद्र गोमा से भाजपा को मिली हार का बदला इस बार भाजपा के सौम्य प्रत्याशी पूर्व बैंक अधिकारी रविंद्र धीमान ने ब्याज समेत चुकाया है। पूरे पांच साल वीरभद्र सिंह से नाराज रहे घुमारवीं के कांग्रेस प्रत्याशी राजेश धर्माणी पर राजेंद्र गर्ग ठीक ठाक भारी पड़े है।

 

ये बचे बाल बाल

यह माना कि हार एक मत से हो तो भी हार होती है। यह वही जानता है जिसके गले में जीत के हार के बजाय हार पड़ती है। हिमाचल प्रदेश की 13वीं विधानसभा के लिए संपन्न मतदान में ऐसे कई लोग हैं जो बतर्ज कहावत बाल बाल बचे।

 

किसी का आंकड़ा 120 तो किसी का कुछ अधिकलेकिन यह आंकड़ा चार डिजिट नहीं छू पाया। यानी जरा सा उलटफेर चुनावी कहानी का अंत पलट सकता था। सबसे कम मतांतर रहा है कबायली जिले किन्नौर में जहां निवर्तमान विधानसभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी 120 मतों से भाजपा के तेजवंत नेगी पर भारी पड़े। तीन डिजिट में मत लेने वाले शीर्ष पांच में से कसौली सीट छोड़ शेष चार सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के

पक्ष में यह अंतर रहा होता तो भाजपा 50 के करीब भी पहुंच सकता था। 

 

2007 की तुलना में बढ़ा भाजपा का मत प्रतिशत

हिमाचल प्रदेश में 2007 से लेकर अब तक के सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मत प्रतिशतता अलग-अलग रही है। तब से लेकर तक यह पहली बार हुआ है कि भाजपा को सर्वाधिक 44 सीटें मिलीं हों। इस बार मत प्रतिशतता में सात का अंतर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यह अंतर 12 प्रतिशत था यानी भाजपा को कांग्रेस से 12 प्रतिशत मत अधिक मिले थे। 2012 का विधानसभा चुनाव भाजपा हारी थी लेकिन 2007 का जीती थी। उस चुनाव में भाजपा को मिले मत प्रतिशत से 2017 में मिला मत प्रतिशत अधिक है। यानी भाजपा ने पांच प्रतिशत की तुलना में इस बार सात प्रतिशत मत अधिक लिए हैं।

 

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