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हिमाचल में वेतन न मिलने से भड़का भारतीय मजदूर संघ, मंत्रियों के आवास घेरने की दी चेतावनी

Published: Fri, 25 Sep 2026 06:05 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में गहराते वित्तीय संकट और कर्मचारियों के लंबित वेतन को लेकर भारतीय मजदूर संघ ने कड़ा रुख अपनाया है।

हिमाचल में वेतन न मिलने से भड़का भारतीय मजदूर संघ। फोटो जागरण

हिमाचल में वेतन न मिलने से भड़का भारतीय मजदूर संघ। फोटो जागरण

HighLights

  1. एचपीटीडीसी में वित्तीय संकट, कर्मचारियों का वेतन लंबित।

  2. भारतीय मजदूर संघ ने ₹100 करोड़ ग्रांट की मांग की।

  3. वेतन भुगतान में देरी पर उग्र आंदोलन की चेतावनी।

संवाद सूत्र, शिमला। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में गहराते वित्तीय संकट और कर्मचारियों के लंबित वेतन को लेकर भारतीय मजदूर संघ ने राज्य सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। मंगलवार को शिमला के रोटरी क्लब में एचपीटीडीसी कर्मचारी यूनियन ने एक प्रेस वार्ता कर अपनी समस्याओं को मुखरता से उठाया।

यूनियन ने सरकार से निगम को इस संकट से उबारने के लिए तत्काल 100 करोड़ रुपये की विशेष ग्रांट देने की मांग की है। मजदूर संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि कर्मचारियों के वेतन को टालना कोई स्थायी समाधान नहीं है। यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कार्ययोजना बनाकर समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

विरोध स्वरूप एक दिन के लिए हिमाचल भवन, मंडी सदन, चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन, सचिवालय, विधानसभा और विली पार्क जैसे स्थानों पर सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और मंत्रियों के आवासों तक भी विरोध प्रदर्शन ले जाया जाएगा। प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा के साथ प्रदेश महामंत्री यश पाल हेटा, प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, मीडिया प्रभारी प्रदीप सिंह तोमर समेत एचपीटीडीसी कर्मचारी यूनियन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

वेतन हर महीने की 1 से 7 तारीख के बीच सुनिश्चित किया जाए 

भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा ने बताया कि सितंबर महीने के 24 दिन बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को अगस्त माह का वेतन नसीब नहीं हुआ है। इसके कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने पुरजोर मांग की है कि भविष्य में कर्मचारियों का वेतन हर महीने की 1 से 7 तारीख के बीच सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए एक स्थायी सैलरी पेमेंट मैकेनिज्म बनाया जाए।

यूनियन ने निगम की आय और संपत्तियों के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि कुल्लू की चार इकाइयों में एक साथ जिर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया गया, जिससे निगम की आय पर सीधा और प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके अलावा, वाइल्ड फ्लावर हाल के संदर्भ में 401 करोड़ रुपये की राशि का जिक्र करते हुए यूनियन ने कहा कि यदि निगम को यहां से नियमित आय मिल रही होती, तो आज यह गंभीर वित्तीय स्थिति पैदा नहीं होती।

वहीं, निगम की 8 इकाइयों को आपरेशन एंड मेंटेनेंस पर देने के दूसरे प्रयास पर भी आपत्ति जताते हुए कहा गया कि कोई भी फैसला लेने से पहले कर्मचारियों के हितों और निगम की आय पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव का अध्ययन होना चाहिए।

1500 से अधिक कर्मचारी हैं परेशान

इस वित्तीय संकट का खामियाजा निगम के लगभग 1,000 नियमित, 70 दैनिक वेतनभोगी और करीब 500 आउटसोर्स कर्मचारी भुगत रहे हैं। वेतन के अलावा कर्मचारियों के डीए, वर्ष 2016 के अंतरिम वेतन के एरियर और पिछले करीब एक साल से लटके हुए मेडिकल और टीए बिलों के शीघ्र भुगतान की भी मांग की गई है। यूनियन ने कहा कि मांगी गई 100 करोड़ की ग्रांट का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर इन देनदारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान के लिए किया जाना चाहिए।