एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली महिला कबड्डी टीम का धर्मशाला में भव्य स्वागत, खिलाड़ियों ने साझा की सफलता की कहानी
भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी पुष्पा राणा, भावना ठाकुर और ज्योति का धर्मशाला पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ।
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एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली महिला कबड्डी टीम का धर्मशाला में भव्य स्वागत। फोटो जागरण
HighLights
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने जीता स्वर्ण पदक।
धर्मशाला पहुंचने पर कप्तान पुष्पा, भावना, ज्योति का भव्य स्वागत।
खिलाड़ियों ने सफलता का श्रेय मेहनत और टीम भावना को दिया।
संवाद सहयोगी, धर्मशाला। एशियन गेम्स का सफर आसान नहीं रहा। लंबे समय की मेहनत ने ही सफलता दिलाई है। धर्मशाला पहुंचने पर सोमवार को तीनों खिलाड़ियों पुष्पा राणा, ज्योति और भावना ने स्वागत के बाद ये विचार साझा किए।
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की सफलता के बाद कप्तान पुष्पा राणा और खिलाड़ी भावना ठाकुर व ज्योति धर्मशाला पहुंचीं और उनका ढोल नगाड़ों से स्वागत किया। भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र साई सेंटर की खिलाड़ियों ने ढोल पर झूम कर खुशी व्यक्त की। खिलाड़ियों का तिलक लगाकर व पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
स्वर्ण जीत कर लौटी तीनों खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, टीम यूनिटी, कोचिंग स्टाफ और परिवार के सहयोग को दिया। खिलाड़ियों ने कहा कि एशियन गेम्स उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण मंच था और इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक सुबह-शाम कड़ा अभ्यास किया था। जिसमें उन्हें सेंटर आफ एक्सीलेंस के स्टाफ का पूरा सहयोग मिला और कोच का मार्गदर्शन भी। तीनों ही खिलाड़ी वाया रोड चंडीगढ़ से धर्मशाला पहुंची।
देश को सम्मान दिलवाने वाली इन तीनों खिलाड़ियों को सरकार से अब रोजगार दिलवाने की उम्मीद है। उधर, साई के सहायक निदेशक जेपी शाहनी ने कहा कि यह हिमाचल और खेल प्राधिकरण के लिए गौरव की बात है। मैं समझता हूं कि मेडल लाना खिलाड़ियों की प्रतिभा और कोच की कोचिंग के अलावा सेंटर के ऊपर निर्भर है कि वह किस प्रकार की सुविधाएं दे रहे हैं।
भारतीय महिला कबड्डी टीम में सेंटर की तीन खिलाड़ी शामिल थीं, जिनमें एक कप्तान थी। यह गर्व की बात है। आने वाले समय में भी सभी खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी। साथ ही उम्मीद है कि प्रदेश सरकार भी साथ दे। स्वर्ण विजेता खिलाड़ियों का हर्षोल्लास से स्वागत किया गया है।
क्या कहती हैं खिलाड़ी?
एशियन गेम्स तक का सफर आसान नहीं रहा। टीम ने इस उपलब्धि के लिए लंबे समय से मेहनत की थी। दूसरे देशों में प्रतियोगिताओं के दौरान मौसम से जुड़ी चुनौतियां भी रहती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अनुभव ने टीम को इन परिस्थितियों से निपटने में मदद की।
टीम यूनिटी और कोचों के बेहतर मार्गदर्शन भी सफलता की बड़ी वजह है। कबड्डी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है और प्रो कबड्डी के बाद इस खेल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान मिल रही है।
प्रदेश सरकार से खिलाड़ियों को रोजगार दे। उम्र अब 29 वर्ष तक पहुंच रही है और लंबे समय से नौकरी का इंतजार है। मुख्यमंत्री से पहले हुई मुलाकात में भी खिलाड़ियों की मांग पर काम करने का आश्वासन मिला था।
- पुष्पा राणा।
एशियन गेम्स में ही भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर खुशी है। वह पहले से ही बेहतर प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल जीतने के लक्ष्य के साथ गई थीं। विरोधी टीमों के खिलाफ पहले खेलने का अनुभव होने के कारण उनके मन में डर नहीं था।
इस सफलता में कोचों, टीम साथियों, भारतीय खेल प्राधिकरण, परिवार और हिमाचल की कबड्डी एसोसिएशन का भी योगदान रहा है। कबड्डी में शुरुआत के दौरान उनके माता-पिता ने उन्हें खेलने के लिए प्रेरित और सहयोग किया। गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना उनके लिए गौरव का क्षण है।
- भावना ठाकुर।
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने की खुशी मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। सभी कोच, फेडरेशन व स्टाफ का इसके लिए हम धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने हमें अच्छी सुविधाएं दीं और हम पर विश्वास दिखाया। इसी का परिणाम है कि हम 100 प्रतिशत दे पाई हैं। स्टाफ के साथ-साथ पारिवारिक सदस्य भी हमें समय-समय पर हौंसला देते रहे।
पिछली बार भी स्वर्ण जीता था और इस बार भी। ईरान की टीम अच्छी थी। जिससे कड़ा मुकाबला हुआ और हम अंत में स्वर्ण जीतने में सफल रहे।
- ज्योति ठाकुर।
