जागरण टीम, शिमला : हिमाचल प्रदेश में सरकार अस्पतालों में मरीजों, आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों, स्कूलों में मिड-डे मिल योजना के तहत विद्यार्थियों और होटलों में पर्यटकों को सेब उपलब्ध करवाएगी। सरकारी एजेंसियों के माध्यम से सेब को पौष्टिक आहार का हिस्सा बनाया जाएगा। इस संबंध में प्रारंभिक खाका खींच लिया गया है और प्रदेश मंत्रिमंडल में चर्चा हो गई है। अब योजना का ड्राफ्ट तैयार होगा और फिर यह अनूठी पहल की जाएगी।

सेब सी ग्रेड का होगा। इसमें से छंटनी कर खाने योग्य सेब को हार्टीकल्चर प्रोड्यूस एंड मार्केटिग, प्रोसेसिग कारपोरेशन (एचपीएमसी) और हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ (हिमफेड) के माध्यम से होटलों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों व अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा। इसके दो से तीन किलोग्राम के पैकेट बनाए जाएंगे। होटलों में सेब कितने रुपये में बिकेगा, इसके दाम तय नहीं हुए हैं। पहले इसकी शुरुआत सरकारी होटलों से होगी। इसके बाद निजी क्षेत्र के होटलों में भी योजना चलाई जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों और मिड-डे मील योजना में भी इसे अतिरिक्त पौष्टिक आहार के तौर पर शामिल किया जाएगा। इससे प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े स्कूलों के बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ व आगंनबाड़ी में छह साल के बच्चों को सेब मिलेगा। सेब के बदले क्या इन सभी स्थानों पर दाम वसूले जाएंगे, इस संबंध में स्थिति कुछ समय बाद स्पष्ट होगी। क्या है सी ग्रेड का सेब

हिमाचल में सी ग्रेड का सेब दो एजेंसियां हिमफेड और एचपीएमसी खरीदती हैं। यह सेब कम गुणवत्ता का होता है। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत इस सेब की खरीद होती है। बागवानों से पिछले वर्ष करीब 70 हजार टन सेब खरीदा गया था। तब प्रति किलो दाम साढ़े नौ रुपये तय किए थे। इसे सेब का समर्थन मूल्य कहा जाता है। एचपीएमसी इस सेब से प्रोसेसिग प्लांट में कई उत्पाद तैयार करता है जबकि हिमफेड इसी सेब को आढ़तियों को बेचता है। इसके पास अपना कोई भी प्रोसेसिग प्लांट नहीं है। हिमाचल में सेब उत्पादन

2010- 5.11 करोड़

2011- 1.38 करोड़

2012- 1.84 करोड़

2013- 3.69 करोड़

2014-2.80 करोड़

2015- 3.88 करोड़

2016- 2.40 करोड़

2017-2.08 करोड़

2018-1.65 करोड़

2019- 3.24 करोड़

2020-2.84 करोड़

2021- 3. 43 करोड़

(उत्पादन का आंकड़ा पेटियों में)

इस बार सेब की बंपर फसल : महेंद्र ठाकुर

राज्य ब्यूरो, शिमला : बागवानी मंत्री महेंद्र ठाकुर ने कहा कि इस बार सेब की बंपर फसल हुई है। सरकार इस बार मिड-डे मील के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में पौष्टिक आहार के तहत सेब भी उपलब्ध करवाएगी। सभी होटल कारोबारियों से आग्रह किया जाएगा कि वे अपने होटलों में छोटी पैकिग में सेब रखें ताकि प्रदेश के बाहर से आने वाले पर्यटकों को वह आसानी से उपलब्ध हो सके। पर्यटक होटल से ही सेब खरीद सकें।

उन्होंने कहा कि इस विषय पर कैबिनेट में चर्चा हुई है और इसका ड्राफ्ट जल्द तैयार होगा। इस बार काफी समय तक बारिश न होने से सेब का आकार नहीं बन पाया है। इसलिए बागवानों को मंडियों में सेब के अधिक दाम मिलने में दिक्कत हो सकती है। इस कारण सरकार की खरीद एजेंसियों एचपीएमसी व हिमफेड पर अधिक दबाव आ सकता है। इसके लिए सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुछ दिनों में शिमला जिला के पराला का प्रोसेसिग प्लांट शुरू कर दिया जाएगा। इसमें शुरुआत में सेब कंसंट्रेटर पर काम किया जाएगा। यह प्रोसेसिग प्लांट शुरू होने से परवाणू प्रोसेसिग प्लांट पर बोझ कम हो जाएगा और कालाबाजारी पर भी लगाम लगेगी। बागवानों से बैठक पहली जुलाई को

सेब कार्टन के दाम में बढ़ोतरी पर बागवानी मंत्री ने कहा कि इस संबंध में कार्टन मालिकों से बातचीत की जा रही है ताकि बागवानों को उचित दाम पर कार्टन उपलब्ध करवाए जा सकें। बागवानी सचिव पहली जुलाई को बागवानों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में प्रदेश के सभी क्षेत्रों से बागवानों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा। महेंद्र सिंह ने कहा कि वह लगातार पेटियां बनाने वाली कंपनियों के साथ संपर्क में हैं और उन पर दाम अधिक न बढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है।

Edited By: Jagran