राज्य ब्यूरो, शिमला। आरएसएस और भाजपा की लड़ाई अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। हाल ही में हुई बोर्ड व निगमों में नियुक्तियों से मचे घमासान से यह बात साबित हो गई है। यह बात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को जारी बयान में कही। उन्होंने कहा कि अब साफ हो गया है कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ही सरकार चला रही है, जयराम तो सिर्फ मुखौटा हैं। नियुक्तियों में उनकी चल ही नहीं रही, न ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को पूछा जा रहा है।

आरएसएस मुख्यालय से ही सीधे नियुक्तिया हो रही हैं। भाजपा और आरएसएस में चल रही वर्चस्व की जंग में आरएसएस की ही चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व उनके समर्थकों को हाशिये पर धकेल दिया है। नियुक्तियों में उन्हें व दिग्गज नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं को भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा। भाजपा-आरएसएस की इस लड़ाई में जनता पिस रही है। विकास कार्य ठप हो गए हैं। नेता अपनी कुर्सी पक्की करने में लगे हैं और जनहित के कायरें की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

भाजपा में दरकिनार हुए कांगड़ा, हमीरपुर व मंडी संसदीय क्षेत्रों के नेताओं का गुबार अभी और फूटेगा क्योंकि सभी भाजपा दिग्गजों को दरकिनार कर आरएसएस के चहेतों को कुर्सी सौंप दी गई है। काग्रेस एकजुट है और भाजपा की लड़ाई पर नजर रखे हुए है। लोकसभा चुनाव में काग्रेस चारों सीटों पर जीत दर्ज करेगी। आखिर इन्हें धकेला हाशिये पर पूर्व सीएम के समधी गुलाब सिंह ठाकुर, रविंद्र रवि, सुरेश चंदेल, राधारमण शास्त्री, रिखी राम कौंडल, रूप सिंह व डॉ अनिल धीमान भी अंदरखाने बेहद नाराज हैं। किसी भी समय इनके सब्र का बाध टूट सकता है।

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