HRTC के बेड़े में 400 ई-बसों के बाद अब अधिकारियों को मिलेंगी ई-कारें, रोजाना 8 लाख लीटर डीजल की होगी बचत
हिमाचल प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी अधिकारियों के लिए 30 इलेक्ट्रिक कारें देने का फैसला किया है, जिससे ईंधन पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।

HRTC के अधिकारियों को मिलेंगी ई-कारें। फोटो जागरण
HighLights
एचआरटीसी अधिकारियों को मिलेंगी 30 नई इलेक्ट्रिक कारें।
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।
ईंधन खर्च में बचत और स्वच्छ परिवहन को मिलेगा बढ़ावा।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की गाड़ियों को अब ग्रीन गियर लगने जा रहा है। पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार एचआरटीसी के अधिकारियों के लिए 30 इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध करवाएगी।
इससे सरकारी कामकाज में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलने के साथ ईंधन खर्च में भी बचत की उम्मीद है। एचआरटीसी के बेड़े में 400 ई बसें शामिल हैं। इनमें 297 ई बसें सितंबर महीने में ही खरीदी गई है। ई बसों से प्रतिदिन 8 लाख डीजल की बचत निगम कर रहा है। बचत से ज्यादा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह अहम पहल है।
सरकारी वाहन भी होंगे इलेक्ट्रिक
सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाने की मुहिम में परिवहन विभाग के बाद एचआरटीसी दूसरा सरकारी उपक्रम होगा, जहां अधिकारियों के इस्तेमाल में आने वाले सभी सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। परिवहन विभाग के अधिकारियों को पहले ही ई-वाहन उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। अब अन्य विभागों में भी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की प्रक्रिया चल रही है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एचआरटीसी की समीक्षा बैठक में इसके निर्देश दिए थे। जिसके बाद इस पर काम शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार सरकार नए वाहन खरीदने के बजाए राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत ई टैक्सी परमिट जिन बेरोजगारों को दिए हैं उन्हें यह काम देगी। इससे निगम में जो पहले से चालक तैनात है उन्हें बसें चलाने का जिम्मा दिया जा सकता है।
धुएं से राहत, खर्च में कटौती की उम्मीद
पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ने से जहां धुंए से राहत मिलेगी वहीं खर्चों में भी कटौती आएगी। बिजली से चलने वाली गाड़ियों का खर्च कम है।
एचआरटीसी का पूरा बेड़ा ही बदल रही सरकार
एचआरटीसी के बेड़े में कुल 3100 बसें शामिल हैं। सरकार 50 प्रतिशत बेड़े को इलेक्ट्रिक में बदलने जा रही है। इसके अलावा हाइड्रोजन बसें भी शामिल होगी। इलेक्ट्रिक बसें जिन रूटों पर नहीं चल सकती वहां पर ही डीजल बसें चलाने की योजना है।
अधिकारियों को ई वाहन देना भी इलेक्ट्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। एचआरटीसी प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा है। निगम के अधिकारियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल सरकारी कामकाज में पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने का संदेश देगा।
सरकार की योजना दूसरे विभागों में भी सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से ई-वाहनों में बदलने की है, ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत और उनसे होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
