रमेश सिंगटा, शिमला

हिमाचल हादसों का प्रदेश साबित हो रहा है। यहां की सर्पीली सड़कें खूनी कहला रही हैं। दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण सड़कों की खस्ताहालत है। हालात यह हैं कि सड़कों के जख्मों की भेंट अनमोल जिंदगियां चढ़ रही हैं। सड़कों की खराब हालत और मानवीय चूक जानलेवा बन रही है।

हादसे रोकने के लिए सरकारों के दावों का धरातल पर कोई असर नहीं दिख रहा है। पुलिस विभाग के जागरूकता अभियान भी कागजी ज्यादा हैं। इनका प्रभाव होता तो सड़कों पर हादसे न होते। प्रदेश की सड़कों पर हर साल औसतन तीन हजार दुर्घटनाएं हो रही हैं। रोजाना करीब नौ हादसे होते हैं। एक दशक में दस हजार से अधिक लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई है। हिमाचल में सड़क हादसे

वर्ष,हादसे,मौतें,घायल

2008,2735,848,4714

2009,3076,1140,5579

2010,3073,1102,5325

2011,3099,1353,5462

2012,2901,1109,5248

2013,2981,1054,5080

2014,3059,1199,5680

2015,3010,1097,5109

2016,3156,1163,5587

2017,3119,1176,5338

2018,1815,691,3166

(इस साल के आंकड़े जुलाई तक) सड़कों का नहीं हो रहा उचित रखरखाव

हिमाचल में 36 हजार किलोमीटर से अधिक मोटर योग्य सड़कें हैं। इनमें से करीब 60 प्रतिशत सड़कें ही पक्की हैं। इन सड़कों का भी उचित रखरखाव नहीं हो रहा है। कच्ची सड़कों पर थोड़ी सी भी बारिश हो जाए तो यातायात भूस्खलन के कारण रुक जाता है। इन सड़कों में यात्रा करना जोखिम भरा हो जाता है। नहीं हैं पैरापिट

स्टेट हाईवे पर भी पैरापिट नहीं हैं। ऐसी सड़कों की तादाद भी कम नहीं है। नई सड़कों के निर्माण में भी कई मार्गो में इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में पैरापिट का प्रावधान नहीं किया गया है। डंगे व क्रैश बैरियर की कमी

प्रदेश में दुर्घटनाओं को लेकर संवेदनशील स्थानों पर डंगे व क्रैश बैरियर कम लगाए गए हैं। अगर इनकी व्यवस्था हो जाए तो हादसे कम होंगे लेकिन लोक निर्माण विभाग का इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं है। सड़कों की हालात सुधरने पर अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है। जांच होती है, कार्रवाई नहीं

जब भी कहीं बड़ा सड़क हादसा होता है तो सरकार जांच के आदेश देती है। लेकिन इन जांच की रिपोर्ट आने तक फिर एक और हादसा हो जाता है। ऐसे में जांच औपचारिकता बन गई है। इनके आधार पर किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है। जानकारों के अनुसार हादसों की संभावना वाली सड़कों की लगातार निगरानी हो। इनकी आलास्तर पर तिमाही आधार पर समीक्षा की जाए। सड़कों की नियमित मरम्मत होनी चाहिए।

Posted By: Jagran