राज्य ब्यूरो, शिमला : भारत जैसे विविध संस्कृति वाले राष्ट्र में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना महत्वपूर्ण है जो युवाओं के दिल और दिमाग में एकता की भावना को उद्धत करने में मदद करते हैं। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को पूर्वोत्तर राज्यों के एबीवीपी कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान कही, जो अंतरराज्यीय छात्र जीवन दर्शन कार्यक्रम के तहत हिमाचल के दौरे पर हैं। राज्य में उनका स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराज्यीय छात्र जीवन दर्शन कार्यक्रम एबीवीपी की पहल है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों में भाईचारे की भावना पैदा करना है।

उन्होंने कहा कि सात राज्यों की मौजूदगी के कारण पूर्वोत्तर भारत की सात बहनों की भूमि भी कहा जाता है, जो विभिन्न मान्यताओं व सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करते हुए 166 से अधिक जनजातियों का निवास स्थान था। पूर्वोत्तर क्षेत्र वास्तव में हमारे महान राष्ट्र के लोकाचार का प्रतिनिधित्व करता है। अंतरक्षेत्र होने के नाते आमतौर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों और उनके परिवारों को पहुंच की कमी का अनुभव होता है, जिसकी पूर्ति इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों से होती है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने राज्यों में एबीवीपी को अधिक सुदृढ़ कर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करें।

अंतरराज्यीय छात्र जीवन दर्शन कार्यक्रम के पदाधिकारी अतुल कुलकर्णी ने कहा कि एबीवीपी ने यह कार्यक्रम 50 साल पहले शुरू किया था, जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ छात्र अपनी पढ़ाई के लिए मुंबई आए थे। उन्हें एक स्थानीय परिवार ने अपनाया था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्र घर लौटने से पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें। सात पूर्वोत्तर राज्यों के 31 विद्यार्थी इस दौरे का हिस्सा हैं, जिसमें 16 लड़कियां शामिल हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. साधना ठाकुर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव संजय कुंडू, मुख्यमंत्री के ओएसडी महेंद्र धर्माणी, प्रो. नागेश, रोहित नेगी, राहुल राणा, डॉ. आलोक पांडे सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

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