जागरण संवाददाता, शिमला : राजधानी शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल आफ शिमला के दूसरे दिन हिमाचल, ईरान, कोरिया, अमेरिका और नेपाल की 20 फिल्में दिखाई गई। इन दिनों गेयटी में फिल्मों के शौकीन पहुंच रहे हैं। फिल्म फेस्टिवल में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी फिल्मों का आनंद ले रहे हैं।

फिल्म फेस्टिवल में 16 देशों की फिल्मों की स्क्रीनिग की जा रही है। इनमें ईरान के निर्देशक हसन नजमावदी की शार्ट फिल्म अपारत की स्क्रीनिग हुई। कोरिया के निर्देशक मैथ्यु की लैंड आफ माय फादर की स्क्रीनिग हुई और इसके निर्देशक मैथ्यू भी दर्शकों से रूबरू हुए। अमेरिका की शार्ट फिल्म ऊंच-नीच और नेपाल में पोलीएंड्री पर आधारित फिल्म हस्बैंड सहायक श्रीमान प्रदर्शित की गई।

अहमदाबाद की प्रभाती आनंद की पहाड़ी शार्ट फिल्म झट आई बसंत दर्शकों द्वारा खूब सराही गई। यह फिल्म धर्मशाला में बनी फिल्म है। मराठी फिल्म लाल के निर्देशक सुमित पाटिल ने दर्शकों से चर्चा के दौरान स्पेशल बच्चों को आने वाली दिक्कतों से अवगत करवाया। रेड फिल्म मानसिक रूप से कमजोर लड़कियों के मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं को उजागर करती है। ऐसी लड़कियों के यूट्रस उनके अभिभावकों द्वारा सर्जरी करवाकर निकाल दिए जाते हैं ताकि उनका यौन शोषण न हो सके और न ही उनके मासिक धर्म के दौरान सफाई व्यवस्था का झंझट उन्हें झेलना पड़े। लेकिन इस कृत्य का उस लड़की के शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जोकि इस फिल्म में बताया गया।

सुमित पाटिल ने दर्शकों से मराठी सिनेमा के बारे में भी बात की। फेस्टिवल में तीन फीचर फिल्मों की भी स्क्रीनिग हुई। ओडिशा के निर्देशक पिनाकी सिंह की दालचीनी, मुंबई में हिमाचल के रहने वाले रूपेंद्र सिंह की फीचर फिल्म स्वीपर और केरल के निर्देशक की ट्रीज इन ड्रीम्स फीचर फिल्मों को दर्शकों ने खूब सराहा।

हिमाचल के निर्देशक स्वर्गीय अभिषेक शर्मा की ओर से निर्देशित शार्ट फिल्म अ मैन एंड हिज शूज को दर्शकों ने खूब सराहा। यह फिल्म एक ऐसे अध्यापक की है, जिसके जूते फट जाते हैं और नए जूते लेने में वह असमर्थ होता है। सेंट एडवर्ड के तीसरी कक्षा के छात्र अर्जुन की फिल्म को मिली सराहना

शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के तीसरी कक्षा के छात्र अर्जुन लोथेटा की फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा। यह फिल्म हमारी परंपराओं में व्याप्त कुरीतियों को उजागर करती है और पीढि़यों के बीच परंपराओं के बदलाव की ओर सबका ध्यान आकर्षित करती है। विभिन्न कालेजों के छात्रों ने फिल्म निर्माण संबंधी बारीकियों को जाना

मुंबई के निर्देशक जतिन चानमा की शार्ट फिल्म द अननोन नंबर कोरोना महामारी के कारण अपने परिवार के सदस्यों को खो चुके लोगों की तकलीफ को दर्शाती है। फिल्म स्क्रीनिग के अलावा फेस्टिवल के दूसरे दिन भी ओपन फोरम का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के अलग-अलग प्रांतों से आए 10 फिल्म निर्देशकों ने हिस्सा लिया और विभिन्न कालेजों के छात्रों ने फिल्म निर्माण संबंधी बारीकियों के बारे में जाना।

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