राज्य ब्यूरो, शिमला : वन भूमि कब्जाने वालों पर अब फिर से कानूनी कार्रवाई होगी। वन विभाग हाईकोर्ट के के आदेश का पालन करेगा। विभाग कब्जाधारियों के रिकॉर्ड को नए सिरे से खंगालने में जुट गया है। एक साल में वन भूमि से असल में कितने कब्जे हटाए, इसे लेकर डाटा कंपाइल किया जा रहा है। असल में राज्य सरकार ने जब से कब्जे नियमित करने के योजना तैयार करने की बात कही थी, तबसे गैर कानूनी तरीके से कब्जाई जमीन के कब्जाधारियों के हौसले भी बुलंद हो गए थे। इसका असर वन महकमे की मुहिम पर भी दिखा। पिछले एक साल में खास मुहिम नहीं चली।

हालांकि सरकार पांच बीघा पर कब्जा करने वालों के लिए ही योजना लेकर आई थी। बाद में चुनाव की घोषणा हो गई। इस कारण पूरी मुहिम ठंडे बस्ते में चली गई। वन भूमि को लेकर केंद्रीय कानून में संशोधन किए बगैर इसे नियमित नहीं किया जा सकता है। राज्य सरकार के अधीन केवल अपनी ही सरकारी भूमि आती है। इस पर अधिक कब्जे नहीं है। कब्जाधारियों को तब तक राहत नहीं मिल सकती, जब तक केंद्र इसमें ठोस कदम न उठाए। इस बीच हाईकोर्ट ने बड़े कब्जाधारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। पहले भी कोर्ट के आदेश पर ही कार्रवाई हुई थी। कब्जाधारियों का जिन्न फिर से बोतल से बाहर आ गया है। यह नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।

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हाईकोर्ट के आदेश का हर हाल में पालन किया जाएगा। पहले कब कब क्या क्या हुआ था, इसका पूरा ब्योरा मांगा गया है। जल्द ही पूरा डाटा कंपाइल हो जाएगा। ऐसा नहीं है कि एक साल के भीतर कब्जे हटाए नहीं गए हैं, लेकिन इसे प्रचारित नहीं किया गया। जंगलों को बचाना के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।

-डॉ. जीएस गौराया, पीसीसीएफ।

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