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एंटीबायोटिक व बच्चों की सीरप समेत 159 दवाओं के सैंपल फेल, हिमाचल, उत्तराखंड और गुजरात में बनी हैं अधिकतर दवाएं

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 22 Jul 2026 12:34 PM (IST)

जून के ड्रग अलर्ट में देशभर की 159 दवाएं और कॉस्मेटिक सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। इनमें ...और पढ़ें

159 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

159 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. जून ड्रग अलर्ट में 159 दवाएं और कॉस्मेटिक सैंपल फेल।

  2. हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात की फार्मा कंपनियों के उत्पाद शामिल।

  3. एंटीबायोटिक, बच्चों के सीरप, हृदय दवाओं की गुणवत्ता खराब।

जागरण संवाददाता, सोलन। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के जून के ड्रग अलर्ट में देशभर की 159 दवाएं एवं कास्मेटिक सैंपल फेल हुए हैं। इनमें 132 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा 27 केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, गुल्लरवालां, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा निर्माण इकाइयों के करीब 45 उत्पाद शामिल हैं। 

बच्चों के सीरप भी शामिल

एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द एवं बुखार, बच्चों के सीरप, खांसी, पेट, आंखों की दवाओं सहित इंजेक्शन तथा विटामिन उत्पादों के सैंपल फेल पाए गए हैं। अधिकांश दवाएं डिसाल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर तथा सक्रिय औषधीय तत्व (एपीआइ) की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर असफल रहीं।

हिमाचल में बनी 45 दवाएं शामिल

जून के ड्रग अलर्ट में हिमाचल के साथ अन्य दो राज्यों के फार्मा उद्योगों में बनी दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। हिमाचल में बनीं 45 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, वहीं उत्तराखंड की 30 और गुजरात की 28 दवाओं के सैंपल फेल मिले हैं। मध्य प्रदेश के 13, तमिलनाडु, महाराष्ट्र व सिक्किम की सात-सात दवाओं के सैंपल फेल मिले हैं। पंजाब, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक, असम सहित अन्य राज्यों से भी कुछ दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। 

ये प्रमुख दवाएं मानकों पर खरी नहीं

हिमाचल के नालागढ़ स्थित पेसिफिक इंडिया उद्योग में बनी जोड़ों के दर्द, आस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस कमर दर्द, मांसपेशियों का दर्द, सूजन और दर्द कम करने के लिए उपयोग होने वाली इटोडोलैक दवा (बैच नंबर पीएनटी5-1754ए), बद्दी स्थित समायन हेल्थकेयर उद्योग में बनी हृदय की तेज धड़कन को नियंत्रित करने के लिए दिया जाने वाला एडनोसाइन इंजेक्शन आइपी (बैच नंबर आइ5के048), सिरमौर के गनोसिस फार्मास्युटिकल्स में निर्मित उच्च रक्तचाप, हृदयाघात और स्ट्रोक के खतरे को कम करने, मधुमेह के मरीजों में किडनी की सुरक्षा के लिए हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए उपयोग होने वाली टेलमिस्ट्रन दवा आइपी 80 एमजी (बैच नंबर पीटी50022ए) का सैंपल फेल हुआ।

गुजरात में बनी ये दवाएं

गुजरात के विमसन डर्मा उद्योग में निर्मित खुजली (स्केबीज) और जुंओं के संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग होने वाला परमेथरिन मेडिकेटिड सोप (बैच नंबर 9147), का सैंपल फेल हुआ। बिहार के हिंदुस्तान मेडिसिनस उद्योग में बनी शरीर में मैग्नीशियम की कमी पूरी करने, गर्भावस्था में दौरे रोकने तथा कुछ गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के उपचार में उपयोग होने वाला मेग्निजियम सल्फेट इंजेक्शन (बैच नंबर 201) भी मानकों पर खरा नहीं उतरा। 

तमिलनाडु के रिवाइव फोर्मूलेशन इंडिया में पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को कम करने, एसिडिटी, गैस्ट्रिक अल्सर और सीने में जलन के इलाज में उपयोग होने वाला रेनिटिडाइन ओरल सोल्यूशन (बैच नंबर आरएएन191), कच्चीपुरम के जेटा फोर्मूलेशन उद्योग में बच्चों और वयस्कों में बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में उपयोग की जाने वाली अजिथ्रोमाइसिन ओरल सस्पेंशन (बैच नंबर 26150), उत्तराखंड के रुड़की में निर्मित एलर्जी, छींक, नाक बहना, आंखों में खुजली, त्वचा पर चकत्ते (पित्ती) और खुजली से राहत के लिए उपयोग होने वाला सिट्राजिन सीरप आइपी (बैच नंबर सीआइजैड-2604), मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सुपर फोर्मुलेशन उद्योग में दस्त या उल्टी के कारण शरीर में पानी और लवण (इलेक्ट्रोलाइट्स) की कमी को पूरा करने तथा डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए उपयोग किया जाने वाला ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट आइपी (बैच नंबर 4047) का सैंपल फेल पाया गया। 

रुड़की के यक्का लाइफसांइस उद्योग में स्केबीज (खुजली) और जुंओं के उपचार में उपयोग होने वाला गामा बेंजेंन हैक्साक्लोराइड लोशन (बैच नंबर 6पी46), महाराष्ट्र के जेजन फार्मा उद्योग में गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण, फेफड़ों का संक्रमण (निमोनिया), मूत्र मार्ग संक्रमण, रक्त संक्रमण, त्वचा, हड्डी और जोड़ों के संक्रमण मस्तिष्क की झिल्ली के संक्रमण में इस्तेमाल होने वाला जेंटामाइसिन इंजेक्शन आइपी-40एम व 2एमएल (बैच नंबर 683511) का सैंपल भी फेल हुआ।

हिमाचल की जिन दवा कंपनियों के सैंपल फेल पाए गए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने सहित नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। कंपनियों से जवाब मांगा है। जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-डा. मनीष कपूर, राज्य औषधि नियंत्रक।

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