यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 13, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कैसे बचें करंट से
जागरण संवाददाता, शिमला : हर घर में बिजली के साथ ही करंट लगने का खतरा भी पहुंच गया है। करंट कैसे ली

जागरण संवाददाता, शिमला : हर घर में बिजली के साथ ही करंट लगने का खतरा भी पहुंच गया है। करंट कैसे लीक होता है और कैसे अपने घर को शॉक प्रूफ बनाकर करंट से बचा जाए, इस संबंध में जागरूक होना जरूरी है।
कैसे लग सकता है करंट
-बिजली उपकरणों में गड़बड़ी या अर्थिग शॉट होना।
-वायरिंग में लीकेज, नंगी तार या लीकेज वाले व्वांट को छूना।
-बिजली उपकरण इस्तेमाल करते समय नंगे पाव होना।
-गीले स्विच या सॉकेट को छूना।
-वायरिंग के पुराने होने, कटने या शॉट होने पर।
-घर में अर्थिग न होना या उसमें लीकेज होना
कैसे बनाएं घर को शॉक प्रूफ
वायरिंग करवाते समय ध्यान रखें कि एक लाइट सर्किट में अधिकतम 800 वॉट का लोड हो। वायर की मोटाई व उसकी करंट वहन करने की क्षमता लोड के हिसाब से तय होनी चाहिए। आमतौर पर 800 वॉट के लोड पर फेज व न्यूट्रल के लिए 1.5 स्क्वेयर एमएम व अर्थ के लिए एक स्कवेयर एमएम की तार ली जाती है। वायर पूरी तरह ताबे से बनी हो। अकसर रीसाइकल्ड वायर मिलते हैं, जिनमें कॉपर के अलावा और चीजें भी मिली होती हैं। ये जल्दी गर्म होकर गल जाती हैं जबकि कॉपर वाली तार जल्द गर्म नहीं होती। नंगी तार न रखें। एक्सटेंशन केबल का इस्तेमाल न करें क्योंकि इनके वायर कटने का डर ज्यादा होता है। एक-दो साल बाद वायरिंग चेक कराते रहें ताकि समय रहते खामी दुरुस्त की जा सके।
ये बरतें सावधानी
-सॉकेट व स्विच पावर सॉकेट ऑटोमैटिकली क्लोज होने वाले हों व बच्चे उनमें उंगली न डालें।
-मेन स्विच की ऊंचाई बच्चों की पहुंच से दूर हो।
-स्विच व सॉकेट ऐसी जगह लगाएं, जहा पानी न पड़े।
- गीले हाथों से स्विच न छुएं।
उपकरण
बिजली के सभी घरेलू उपकरण डबल इंसुलेटेड हों। इससे करंट लगने का खतरा कम हो जाता है। वॉशिग मशीन, रेफ्रिजरेटर, गीजर, माइक्रोवेव अवन आदि की सफ ाई समय-समय पर करते रहें क्योंकि इनमें जमा होने वाली धूल व ग्रीस इंसुलेशन समाप्त कर करंट का माहौल बनाती हैं। सफाई सूखे कपड़े से करें। वाशिग मशीन या कूलर में पानी डालने और एसी चेक करने से पहले उनके प्लग बाहर निकाल लें। बिजली के उपकरण छूने से पहले रबड़ की चप्पल पहन लें।
हर कमरे के लिए अलग हो एमसीबी
हर कमरे के लिए अलग मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी ) लगवाएं। अलग एमसीबी शॉर्ट सर्किट होने पर उस जगह का करंट बंद कर देगी। एमसीबी के ऊपर एक रेजिड्यूल करंट सर्किट ब्रेकर (आरसीसीबी)भ ी लगवाना चाहिए। करंट लीकेज होते ही यह मेन स्विच से ही आपके घर की पूरी सप्लाई बंद कर देगा। आरसीसीबी कम ही लोग लगवाते हैं लेकिन यह बेहतर सुरक्षा देता है। एमसीबी के रेट 50 से 1000 हजार रुपये और आरसीसीबी के केट करीब 500 रुपये हैं। छह से 63 एम्पियर तक के एमसीबी आते हैं। हल्के लोड जैसे पंखे, ट्यूब, बल्ब, रेफ्रिजरेटर, कूलर आदि के लिए दस एम्पीयर की और पावर लोड जैसे प्रेस, वॉशिग मशीन, अवन, मिक्सी, गीजर आदि के लिए 16 एम्पीयर की एमसीबी इस्तेमाल की जाती है।
अन्य सावधानिया
- बिजली का कोई भी काम पंजीकृत इलेक्ट्रिशन से ही करवाएं। खुद कोशिश न करें। पंजीकृत डीलर से नामी कंपनी का सामान ही खरीदें।
अर्थिग कैसे की जाए
घर को करंट से बचाने के लिए सही तरीके से अर्थिग करवाना जरूरी है। जमीन के नीचे पानी के लेवल व नमी के आधार पर गड्ढा खोदकर इलेक्ट्रॉड के रूप में ताबे की प्लेट व उससे जुड़ी ताबे की तार, कच्चा कोयला और आइसक्रीम फैक्ट्री में काम आने वाला कच्चा नमक डाला जाता है। नमक व कोयले का इस्तेमाल नमी बनाए रखने के लिए किया जाता है। ताबे की तार को घर की मेन अर्थिंग में जोड़ दिया जाता है। इससे पूरे घर में अर्थिंग हो जाती है और करंट लगने का डर कम हो जाता है।
अर्थिग कैसे चेक करें
अर्थिग सही है या नहीं, इसे अर्थ टेस्टर द्वारा चेक किया जा सकता है। अर्थिग की पहचान के लिए सॉकेट के प्वांट में टेस्टर डालें। टेस्टर की लाइट न जले तो अर्थिग ठीक है व जले तो अर्थिग लीक हो रही है। अर्थ टेस्टर की कीमत 1000 से 1500 रुपये होती है। करंट लीक होने का पता चलने पर सूखी लकड़ी या प्लास्टिक की छड़ से मेन स्विच ऑफ कर दें और इलेक्ट्रिशन को दिखाएं।
करंट लगने पर क्या करें
करंट लगने पर जान भी जा सकती है। अगर जान बच जाए तो जिस अंग में करंट लगा हो, वह बेकार हो सकता है। इसके अलावा दिल और अप्रत्यक्ष रूप से नर्वस सिस्टम व दिमाग भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में करंट लगने पर तुरंत कदम उठाएं। सबसे पहले पीड़ित के उस अंग पर साफ पट्टी लपेट दें जहा तार छुई है। मरीज को चाय, पानी या खाने के लिए कुछ न दें ताकि अस्पताल ले जाने पर खाली पेट रहने से इलाज में आसानी हो। उसके आसपास भीड़ न लगाएं। आरामदायक स्थिति में लिटा दें और हौसला बढ़ाते रहें। उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं। अस्पताल में हल्का करंट लगने पर फर्स्टएड, पेन किलर की गोलिया, टिटनेस का इंजेक्शन और ईसीजी जाच कराई जाती है। गंभीर मामला होने पर मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है।
