राज्य ब्यूरो, शिमला : पंजाब सरकार ने जोगेंद्रनगर स्थित शानन पावर हाउस को बंद होने की कगार पर पहुंचा दिया है। पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड की अनदेखी के कारण परियोजना जर्जर हालत में है। 99 वर्ष की पट्टा अवधि वर्ष 2024 में समाप्त होनी है। वर्ष 1925 के मूल 'मंडी दरबार समझौते' के अनुरूप हिमाचल सरकार को स्वयं इस परियोजना का स्वामित्व मिलना है। इस कारण पंजाब ने कई साल से परियोजना की सुध लेना छोड़ दिया है। पूर्व राजस्व मंत्री ठाकुर गुलाब सिंह ने यह मामला राज्य सरकार सहित पंजाब व भारत सरकार से उठाया है।

गुलाब सिंह ने यहां पत्रकारों से कहा कि इस अनदेखी से ही स्कूल व डिस्पेंसरी तो बंद हो गए और सड़कें, कंज्यूमर स्टोर व रेलवे ट्रैक की भी हालत खस्ता है। परियोजना के कर्मचारी भी 380 से 170 रह गए हैं। नतीजतन पर्यटकों के मन भाने वाली यह परियोजना उन्हें पसंद होना बंद हो गई है। परियोजना में ट्रॉली लाइन भी चार वर्षो से बंद है। इस मामले पर सांसदों को भी पत्र लिखे हैं कि शानन पावर हाउस को हिमाचल के अधीन करने के लिए प्रधानमंत्री पर दबाव बनाएं या फिर पंजाब सरकार से चर्चा कर ज्वांइट वेंचर से परियोजना की मरम्मत करवाई जाए ताकि यह हिमाचल को सही अवस्था में ही मिले। शानन परियोजना की स्थापना के लिए 3 मार्च 1925 को तत्कालीन पंजाब सरकार एवं मंडी के राजा के बीच समझौता ज्ञापन हुआ था। इसके अंतर्गत मंडी के राजा ने परियोजना के लिए 99 वर्ष के लिए आवश्यक भूमि पट्टे पर दी थी। इस पावर हाउस की स्थापना वर्ष 1932 में हुई थी। उस समय इसकी क्षमता 48 मेगावाट थी। इसकी क्षमता को वर्ष 1982 में 110 मेगावाट तक बढ़ाया गया। इसके बाद 25 दिंसबर, 1935 को प्रथम प्रतिपूरक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अंतर्गत मंडी तथा जोगिंद्रनगर के बीच एचटी लाइन का विस्तार किया गया। नौ अप्रैल, 1965 को पंजाब राज्य विद्युत परिषद एवं हिमाचल प्रदेश की ओर से भारत के राष्ट्रपति के बीच हस्ताक्षरित दूसरे प्रतिपूरक समझौते के अंतर्गत मंडी रियासत के लिए प्रदान निशुल्क पांच सौ किलोवाट बिजली को हिमाचल प्रदेश में कहीं भी उपयोग में लाने की अनुमति दी गई थी। नौ अप्रैल, 1967 को तत्कालीन पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में यह समझौता किया गया कि शानन परियोजना का प्रबध्ान एवं स्वामित्व पंजाब के पास रहेगा, जबकि बस्सी पावर हाउस का स्वामित्व एवं प्रबंधन हिमाचल प्रदेश के पास रहेगा। हिमाचल सरकार व पंजाब राज्य विद्युत परिषद के बीच 28 अगस्त, 1975 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके अंतर्गत शानन परियोजना में पचास मेगावाट विस्तार परियोजना की स्थापना से अतिरिक्त ऊर्जा में हिमाचल को प्रति वर्ष उत्पादन दर पर 45 मिलियन यूनिट मिलनी थी। पूर्ण राज्यत्व का दर्जा मिलने के बाद भी इसे हिमाचल को नहीं सौंपा गया। विभिन्न स्तरों पर मामला उठाने के बाद भी नकारात्मक परिणाम ही मिले। वर्ष 1981 में तो विधानसभा में परियोजना को हिमाचल को हस्तांतरित करने के लिए संकल्प प्रस्ताव को पारित कर भारत सरकार के समक्ष भी भेजा गया था, जिस पर भी इन्कार ही मिला है।