राज्य ब्यूरो, शिमला : प्रदेश में कभी डीजल की कमी और कभी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बार-बार हांफ रही 108 एंबुलेंस सेवा की प्रदेश सरकार समीक्षा करेगी। 2010 से चल रही इस एंबुलेंस सेवा के लिए 2017 में फिर पांच साल के लिए करार हुआ है। कांग्रेस सरकार के समय में हुए करार के तहत कंपनी को पांच वर्ष के लिए एंबुलेंस सेवा देनी थी, लेकिन वर्तमान में कंपनी ऐसा नहीं कर पा रही है।

नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा में बार-बार कोताही के कारण अब जयराम सरकार ने पूर्व काग्रेस सरकार के समय हुए करार की समीक्षा का फैसला लिया है। जीवन रक्षक एंबुलेंस सेवा 108 वर्ष 2010 से चल रही है। जबकि 102 एंबुलेंस सेवा बाद में शुरू की गई थी। 2017 में पांच साल के लिए हुए करार के अनुसार कंपनी (जीवीके-ईएमआरआइ)ने 2022 तक यह सेवाएं देनी थीं। लेकिन वर्तमान में हालात ऐसे पैदा हो गए हैं कि कंपनी नियमानुसार एंबुलेंस सेवाएं देने में असफल रही है। एंबुलेंस सेवाओं की लचरता के कारण लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं। कंपनी में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ा।

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कांग्रेस ने 2022 तक किया समझौता पूर्व काग्रेस सरकार ने 2017 में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले जीवीके-ईएमआरआइ कंपनी के साथ 2022 तक समझौता किया था। प्रदेश में 108 सेवा के तहत 198 एंबुलेंस चल रही हैं, इसके एवज में कंपनी को हर साल करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है। इस योजना के तहत 90 फीसद खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी जबकि दस फीसद खर्च प्रदेश सरकार देती है। हिमाचल समेत देश के कई राज्यों में सेवा दी जा रही है।

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रद किया जा सकता है करार 108 एंबुलेंस सेवा की शुरूआत तो ठीक रही, लेकिन धीरे-धीरे यह सेवा पटरी से नीचे उतर गई। इस सेवा खामियों के संबंध में लगातार शिकायतें आ रही हैं। जीवीके कंपनी के कर्मचारियों ने भी शोषण के आरोप लगाए हैं। इसी वजह से प्रदेश सरकार ने राज्य में जीवीके कंपनी के साथ हुए समझौते की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इसके तहत कंपनी के साथ या तो नए सिरे से समझौता किया जा सकता है या उसे रद भी किया जा सकता है। साथ ही समझौते में नई शतर्ें भी लगाई जा सकती हैं।

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सरकार के लिए जन सुविधा उपलब्ध करवाना सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है, लेकिन कंपनी के हाथ खड़े हो चुके हैं। कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए पांच वर्ष के लिए एक साथ करार क्यों किया। 2022 तक किए गए करार की समीक्षा की जाएगी। यदि जरूरी हुआ तो पुराना समझौता रद कर नई व्यवस्था हो सकती है।

-विपिन सिंह परमार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री।

Posted By: Jagran