संवाद सहयोगी, कुल्लू : विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र वाले कुल्लू जिले के मलाणा गांव में लोग तीन माह से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पाइपलाइन के जमने के कारण मलाणा के साराबेहड़ व धाराबेहड़ गांव के लोग सदियों पुरानी पेयजल बावड़ियों से हिमपात के बीच पैदल करीब आधे घंटे का सफर करके पानी लाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों की हर परेशानी व दुख को हरने वाले देवता जमलू (जमदग्नि ऋषि) सर्दियों के मौसम में और भारी हिमपात की स्थिति में भी साराबेहड़ के ग्रामीणों की पेयजल संकट में सहारा बने हुए हैं। साराहबेहड़ गांव में देवता की वर्षों पुरानी पेयजल बावड़ी है वहां से लोग पेयजल इस्तेमाल कर रहे हैं। धारोबेहड़ के लोगों को पैदल चलकर बावड़ी में करीब एक से डेढ़ घंटे तक बर्तनों में पानी भरने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, या फिर मजबूरन बर्फ को पिघलाकर खुद व पशुओं के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। धाराबेहड़ स्थित इस बावड़ी हालांकि ऊपर से ढकी हुई है लेकिन बाहर पानी की बूंद-बूंद ही आ रही है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीण रामजी, भागी राम, रूप सिंह, हीमराज सहित के अनुसार तीन माह से नलों में पानी नहीं आ रहा है। विभाग से आग्रह किया है पेयजल पाइपों को दुरुस्त किया जाए। गांव में करीब एक फीट तक हिमपात है और रविवार को लगातार हिमपात का सिलसिला जारी रहा। ऐसे हालातों में लोगों को पेयजल के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।

मलाणा के प्रधान राजूराम ने बताया कि हिमपात के कारण पिछले तीन माह से पेयजल की दिक्कतें पेश आ रही हैं, पेयजल पाइपें जम गई हैं और कई जगह से टूटी भी हैं।

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मामला मेरे ध्यान में नहीं है, हिमपात के कारण पाइपें जम गई होंगी, यदि ऐसा है तो इसके लिए फील्ड के स्टाफ को पानी की समस्या को हल करने के निर्देश दिए जाएंगे।

-केआर कुल्लवी, अधीक्षण अभियंता जलशक्ति विभाग कुल्लू।

Edited By: Jagran