संवाद सहयोगी, मंडी : हरियाणा के लाडवा व अन्य क्षेत्रों में टमाटर की बंपर पैदावार ने दूसरे राज्यों के व्यापारियों को पहाड़ चढ़ने से रोक दिया है। मैदानी क्षेत्रों में आसानी से टमाटर की फसल उपलब्ध होने से व्यापारी फिलहाल हिमाचल की तरफ रुख नहीं कर रहे है। पंजाब, हरियाणा के टमाटर से दिल्ली व पंजाब की मंडियों में फसल के दाम भी गिर चुके हैं। इस कारण दूसरे राज्य के व्यापारी फिलहाल हिमाचल में टमाटर की खरीद कर किसी तरह का जोखिम उठाना नहीं चाहते है। ऐसे में मिनी पंजाब के नाम से मशहूर मंडी जिले की बल्ह घाटी के किसान स्थानीय सब्जी मंडियों में टमाटर बेचने के लिए मजबूर हैं।

बल्ह घाटी का लाल सोना दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा राज्यों में अपनी महक बिखेरने के लिए तैयार हो चुका है लेकिन किसानों को दूसरे राज्यों से आने वाले व्यापारियों का अभी इंतजार करना पड़ रहा है। बल्ह घाटी के राजगढ़, स्टोह, कैहड़, चवाड़ी, खांदला, कुम्मी, नलसर, बग्गी, लोहारा, डिनक, ढाबण, कनैड, छातर, साईं, नेरचौक, स्योहल, सिहन व नागचला में खेत इन दिनों टमाटर की फसल से लद गए हैं। टमाटर की खरीद के लिए हर साल जम्मू, राजस्थान, हरियाणा, देहरादून और पंजाब के व्यापारी टमाटर खरीदने के लिए पहुंचते हैं लेकिन इस बार व्यापारियों को पंजाब हरियाणा में टमाटर कम दाम पर मिल रहा है। इस कारण व्यापारी फिलहाल हिमाचल की ओर नहीं पहुंच रहे है।

बल्ह घाटी के प्रमुख टमाटर उत्पादक व प्रगतिशील किसान तेज सिंह ठाकुर व मनी राम ने बताया कि पंजाब हरियाणा में टमाटर का सीजन खत्म होने के बाद व्यापारी हिमाचल की ओर रुख करते है। लेकिन इस साल अधिक बारिश न होने से अभी तक पंजाब हरियाणा में टमाटर का सीजन जारी है। स्थानीय सब्जी मंडियों में डेढ़ से दो सौ रुपये प्रति क्रेट टमाटर की बिक्री हो रही है। जबकि गत वर्ष व्यापारी वर्ग खेतों से ही सात से आठ सौ रुपये क्रेट की खरीद कर रहे थे।

खीरा कर रहा मालामाल

बल्ह घाटी में टमाटर के साथ इन दिनों खीरे की फसल भी तैयार है। सब्जी मंडी में ही खीरे का न्यूनतम मूल्य 15 रुपये जबकि अधिकतम मूल्य 30 रुपये तक पहुंच गया है। स्थानीय व्यापारी किसानों से दो हजार से पच्चीस सौ रुपये प्रति क्विटल की दर से खीरे की खरीद कर रहे है। टमाटर के दाम लुढ़कने की भरपाई खीरा कर रहा है।

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