सहयोगी, पद्धर : प्राचीन शिव मंदिर पद्धर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक आचार्य प्रकाश शैल ने कहा कि मनुष्य भक्ति के मार्ग से मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। इसके लिए निष्काम भाव से ईश्वर की भक्ति करने की आवश्यकता है। भक्तिहीन संतान के माता-पिता आत्महत्या जैसे कदम को मजबूर होते हैं। अंदर की बुराइयों को खत्म करने के लिए भक्ति जैसा सद्मार्ग कोई नहीं है। मनुष्य मोह और माया जाल में भृमित हो कर प्रभु सिमरन के लिए दो क्षण निकालने में समर्थ नहीं है। जबकि संकट के समय में बार-बार ईश्वर को याद करता है। यह व्यवहारिक जीवन की बुराई है, अगर बिना किसी स्वार्थ के निष्काम भाव से प्रभु को याद करे तो जीवन में संकट प्रभु स्वयं हर लेते हैं। मनुष्य को कभी भी किसी की ¨नदा या बुराई नहीं करनी चाहिए। अपितु एक दूसरे के दुख को बांटने के लिए आगे आना चाहिए। कथा का आयोजन बाबा देवी दास निर्वाण के सानिध्य में किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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