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दुनिया की सबसे ऊंची रैली ऑफ हिमालयाज में हिमाचल की श्रेया लोहिया ने रचा इतिहास, दो पोडियम जीतकर बढ़ाया देश का मान

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 06 Oct 2026 05:56 PM (IST)

श्रेया लोहिया ने दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन जेके टायर रैली ऑफ हिमालयाज 2026 में सबसे कम उम्र की ...और पढ़ें

हिमाचल के सुंदरनगर की श्रेया लोहिया।

हिमाचल के सुंदरनगर की श्रेया लोहिया।

HighLights

  1. श्रेया लोहिया ने रैली ऑफ हिमालयाज में सबसे कम उम्र की महिला प्रतियोगी बनीं।

  2. दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन रैली में जीते दो शानदार पोडियम।

  3. अब गुरुग्राम ड्रिफ्टिंग चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं युवा रेसर।

जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल से संबंध रखने वाली युवा रेसर श्रेया लोहिया ने मोटर स्पोट्र्स की दुनिया में एक ऐतिहासिक और शानदार उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में संपन्न हुई दुनिया की सबसे ऊंची और बेहद कठिन जेके टायर रैली ऑफ हिमालयाज 2026 में श्रेया ने सबसे कम उम्र की महिला प्रतियोगी के रूप में हिस्सा लेते हुए इतिहास रच दिया है।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में क्रॉस कंट्री रैली

इस साहसिक और चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता में उन्होंने दो शानदार पोडियम अपने नाम किए हैं। यह प्रतिष्ठित चार दिवसीय क्रॉस कंट्री रैली 26 से 30 सितंबर के बीच लाहुल-स्पीति और जांस्कर के बेहद दुर्गम और जोखिम भरे क्षेत्रों में आयोजित की गई थी।

140 प्रतिभागियों ने भाग लिया

इस रोमांचक प्रतियोगिता का छठा संस्करण कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, जिसमें मोटो, एक्सट्रीम और टीएसडी श्रेणियों के तहत कुल 140 दिग्गज प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया। 

16500 फीट ऊंचे दर्रे से गुजरे वाहन

इस रूट में कुंजुम ला, पेंसी ला और शिंकुला ला जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे और खतरनाक दर्रे शामिल थे, जहां मार्ग 16,500 फीट से भी अधिक ऊंचाई पर पहुंचे। इस अत्यंत ऊंचाई पर हवा, कड़ाके की ठंड, अप्रत्याशित मौसम, ढलानें, पत्थरों और बर्फीली पगडंडियों के बीच गाड़ी चलाना और खुद को संभालना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था।

मनाली से शुरू होकर जांस्कर घाटी तक का सफर

यह चार दिवसीय रोमांचक रैली मनाली से शुरू होकर काजा से होते हुए छतड़ू पहुंची। इसके पश्चात दारचा से होते हुए जांस्कर घाटी के पदम में इसका समापन हुआ। इस दुर्गम रूट पर नेविगेशन, यांत्रिक विश्वसनीयता, शारीरिक सहनशक्ति और पलक झपकते ही सही निर्णय लेना गति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था। ऐसे हालातों में सफलता हासिल करना ही अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

अब गुरुग्राम ड्रिफ्टिंग चैंपियनशिप की तैयारी

रैली आफ हिमालयाज में अपनी धाक जमाने के बाद, प्रतिभावान श्रेया लोहिया अब आराम करने के मूड में नहीं हैं। वह आगामी गुरुग्राम ड्रिफ्टिंग चैंपियनशिप की तैयारियों में पूरी मेहनत से जुट गई हैं। इस प्रतियोगिता के लिए उनकी विशेष कार को तैयार करवाया जा रहा है, जिससे वह मोटरस्पोर्ट्स के मैदान पर एक बार फिर अपनी रफ्तार का जलवा बिखेरने को पूरी तरह तैयार हैं।