संवाद सहयोगी, सरकाघाट : उपमंडल सरकाघाट के मुख्यालय स्थित राज्य वन निगम के तहत चल रहे लकड़ी के डिपो में 90 क्विंटल लकड़ी को दीमक चट कर गई और रही सही कसर अब बारिश ने पूरी कर दी। अब यहां केवल इतनी ही और लकड़ी बची है, उसके लिए भी निगम को खरीददार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उसके खराब होने की संभावना भी अधिक है। लगभग 70 हजार की लकड़ी खराब हुई।

वर्ष 2001 में लोगों की मांग पर सरकाघाट में राज्य वन निगम का डिपो खोला गया था। यहां से लोगों को लकड़ी उनकी डिमांड अनुसार बेची जाती थी, लेकिन वर्तमान समय में लकड़ी की डिमांड न होने के कारण अब यह डिपो में ही खराब हो रही है। खुले में रखी होने के कारण बारिश के पानी से यह गल रही है साथ ही दीमक का हमला भी इस पर होने से यह किसी काम की नहीं रह गई है। जानकारों की मानें तो पहले लोग चूल्हा जलाने या अन्य कार्यों के लिए लकड़ी लेते थे, लेकिन अब हर घर में गैस होने के बाद से इसकी डिमांड दिन व दिन कम होती गई। हैरानी की बात है कि वर्तमान में लकड़ी की रखवाली करने के लिए निगम ने एक चौकीदार की नियुक्ति की है, जबकि यहां आमदनी शून्य है। तो इस लकडी के डिपो पर लाखों का खर्च क्यों किया जा रहा है। उधर इस बारे जब निगम के इस डिपो के प्रभारी रेंज आफिसर कल्याण सिंह ने बताया कि निगम द्वारा हर महीने की बीस तारीख को इस लकड़ी की बोली रखी जाती है, लेकिन कोई भी खरीददार नहीं आता। लकड़ी की दुर्दशा बारे निगम के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है और जो भी आदेश उच्चाधिकारियों से मिलेंगे उनका पालन किया जाएगा।

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