जागरण संवाददाता, मंडी : जिले में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पैराग्लाइडिग के साथ रिवर राफ्टिंग की राह भी साफ हो गई है। ब्यास नदी में साढ़े छह किलोमीटर रिवर राफ्टिंग साइट में पहले झीड़ी से फरमेंटा तक साढ़े चार किलोमीटर क्षेत्र राफ्टिंग के लिए सही पाया गया है। इसे पनारसा तक करना था, लेकिन दो-तीन जगह खतरा होने के कारण इसका बाद में ट्रायल होगा।

मार्च 2020 में पर्यटन विभाग ने जिले में ब्यास नदी पर रिवर राफ्टिंग के लिए योजना तैयार की थी। इसके तहत झीड़ी से फरमेंटा तक साढ़े चार किलोमीटर व फरमेंटा से पनारसा तक ढाई किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण हुआ था। कोरोना के कारण काम लटक गया। अब दोबारा किए सर्वेक्षण में फरमेंटा से पनारसा तक तीन जगह खतरनाक प्वाइंट मिले हैं। इस कारण अब पर्यटन विभाग ने पहले झीड़ी से फरमेंटा तक ही रिवर राफ्टिंग करवाने की योजना बनाई है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद विभाग रिवर राफ्टरों से आवेदन मांगेगा। विभाग के तय मानकों को पूरा करने वालों को राफ्टिंग करवाने की अनुमति दी जाएगी।

ब्यास का जलस्तर कम होने पर पनारसा तक होगा ट्रायल

फरमेंटा से आगे पनारसा तक ढाई किलोमीटर तक ब्यास का जलस्तर कम होने पर पर्यटन विभाग ट्रायल करेगा। यहां अगर चिन्हित किए गए स्थानों में खतरा नहीं दिखा तो इसे मंजूरी दी जाएगी।

लारजी डैम तक होगी राफ्टिंग

पर्यटक झीड़ी व फरमेंटा से राफ्टिंग कर पनारसा और लारजी डैम तक भी आ सकते हैं। इसके लिए पर्यटन विभाग सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखेगा। डैम प्रबंधन सुरक्षा मानकों के अनुसार राफ्टरों को लारजी तक आने की अनुमति मिलेगी, क्योंकि लारजी में भी साहसिक खेलें शुरू करने के लिए पर्यटन विभाग की टीम सर्वेक्षण कर चुकी है। झीड़ी से फरमेंटा तक साढ़े चार किलोमीटर क्षेत्र राफ्टिंग के लिए सही पाया गया है। फरमेंटा से पनारसा तक बाद में ट्रायल किया जाएगा।

-एसके पराशर, जिला पर्यटन अधिकारी मंडी

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