जागरण संवाददाता, मंडी : जहरीली शराब मामले में पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है। तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। शराब माफिया के चार छोटे सदस्यों को पकड़ कर पुलिस अधिकारी वाहवाही लूटने का प्रयास कर रहे हैं। जहरीली शराब किस बाटलिग प्लांट में बनी थी, किस राज्य से सप्लाई आती थी, बोतल पर लगने वाला स्टीकर कहां प्रिट होता था, बोतलें कहां से खरीदी जाती थीं और खाली पेटियां कहां बनती थीं, इन सवालों का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है।

शराब के अवैध कारोबार से जुड़े माफिया ने सलापड़ से सुंदरनगर तक मनाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अपने स्टोर बना रखे थे। पुलिस को हर बात की जानकारी थी फिर भी तमाशबीन बनी रही। शराब के अवैध कारोबार से माफिया ने अकूत संपत्ति बनाई है। मुख्य सरगना भनवाड़ पंचायत का रहने वाला है। सात लोगों की मौत के बाद वह भूमिगत है। उसने लाखों की संपत्ति बनाई है। उससे कई बार अवैध तरीके से रखी शराब बरामद हुई है। मिलीभगत के कारण वह हर बार बच जाता था। थाना सुंदरनगर, बीएसएल कालोनी, पुलिस चौकी सलापड़ व डैहर में पिछले कई साल से तैनात कई पुलिस कर्मियों की शराब माफिया के साथ सांठगांठ थी। माफिया ने बांट रखे थे क्षेत्र

विवाद से बचने के लिए माफिया ने शराब की अवैध रूप से सप्लाई के लिए क्षेत्र बांट रखे थे। चंडीगढ़ से आने वाली सप्लाई बिलासपुर का एक व्यक्ति मुख्य सरगना तक पहुंचाता था। सलापड़ में ट्रक से सप्लाई उतारने के बाद शराब जीप में अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी जाती थी। खेप जल्द से जल्द ठिकाने लगाने के लिए कुछ लोग सस्ती दर पर शराब बेच देते थे। इसके लिए माफिया में कई बार विवाद भी हो जाता था। संतरा ब्रांड की नकली शराब की एक बोतल का दाम 150 रुपये व अंग्रेजी शराब का 220 रुपये तय था। आबकारी एवं कराधान विभाग व पुलिस के बीच ठनी

कल तक शराब की एक बोतल पकड़ने पर उसका श्रेय लेने वाली पुलिस सात लोगों की मौत के बाद अब अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। इस पूरे प्रकरण का ठीकरा आबकारी एवं कराधान विभाग के सिर फोड़ने का प्रयास हो रहा है। जानकार बताते हैं कि आबकारी विभाग का काम पंजीकृत ठेकेदार व बाटलिग प्लांट में व्यवस्था जांचना है। शराब की अवैध बिक्री पर कार्रवाई करना पुलिस का काम है। जहरीली शराब को लेकर अब आबकारी एवं कराधान विभाग व पुलिस में ठन गई है। दोनों विभागों के अधिकारी अब एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

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