सरकार ने किसान, वरिष्ठ नागरिकों और बेराजगार युवाओं के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान कर इतिहास रचा है। पन बिजली उत्पादन और पर्यटन को बढ़ावा देने का जो लक्ष्य रखा है इससे प्रदेश में रोजगार के नये आयाम स्थापित होंगे।

-लोकेश शर्मा, जोगेंद्रनगर।

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नगर परिषद के प्रतिनिधियों के भी मानदेय को बढ़ाया गया है। यह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सराहनीय पहल है। प्रतिनिधियों के मानदेय बढ़ने पर उन्हें और अधिक काम के प्रति निष्ठा बढ़ाएगा। मछली पालन में बढ़ोतरी और भेड़ पालकों को 60 फिसदी अनुदान भी काबिले तारीफ है।

-अजय धरवाल, पार्षद, नगर परिषद जोगेंद्रनगर।

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गो-सेवा आयोग का गठन गोवंश संरक्षण के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। गोमूत्र से आधारित उद्योग स्थापित होने से भी रोजगार मिलेगा। मंदिर के चढ़ावे का 15 प्रतिशत गोसदनों पर खर्च करना सराहनीय है। हजारों लोगों को लावारिस पशुओं से निजात मिलेगी।

-विजय जम्वाल, समाजसेवी एवं उपाध्यक्ष गोसदन जोगेंद्रनगर।

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अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए बजट में करोड़ों रुपये का प्रावधान का निर्णय प्रदेश को उन्नति की और अग्रसर करेगा। धार्मिक स्थानों को हवाई सेवा से जोड़ने से प्रदेश व्यापार के तौर पर भी सुदृढ़ होगा।

-समीर सूद, जोगेंद्रनगर

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प्रदेश सरकार का बजट मिलाजुला है। मुख्यमंत्री ने बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी कोई सौगात नहीं दी है। इस बजट में पिछले दरवाजे से मिली नौकरियों के उम्मीदवारों को हटाने बारे कुछ भी नहीं कहा गया है।

-मधु सूदन, युवा सरकाघाट।

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बजट में मंहगाई को नियंत्रित करने के कोई घोषणा नहीं की गई। महिलाओं को उम्मीद थी बजट सत्र के दौरान महंगाई से राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया। कृषि के विकास के लिए सरकार फैसला स्वागत योग्य है।

-दमयंती देवी, गृहणी सरकाघाट

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बजट काफी सराहनीय है। इसमें शिक्षा के बजट में वृद्धि से हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। वहीं सेनेटरी नेपकिन सस्ते दाम पर मिलने से महिलाओं पर अतिरिक्त खर्चे का बोझ कम होगा।

-आदित्य शर्मा, युवा सरकाघाट।

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प्रदेश सरकार के पहले ही बजट में जनप्रतिनिधियों को निराश कर दिया है। पंचायत प्रधानों को दिए इस बजट में सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरे के समान वाली बात है। पंचायत प्रधान के मानदेय में की गई बढ़ोतरी न के बराबर है।

-अंजु देवी, प्रधान, पंचायत बग्गी।

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बजट में पंचायत प्रधानों का मानदेय बढ़ाने से ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री ने प्रधानों के साथ एक मजाक किया है। पंचायत प्रधानों को इस बजट से ऐसी उम्मीद नहीं थी। जनप्रतिनिधियों को निराशा मिली है।

-पंकज चौधरी, प्रधान, सलवाहन पंचायत।

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मुख्यमंत्री ने पहले बजट में ही पंचायत प्रधानों का मानदेय एक हजार रुपये बढ़ाकर उंट के मुह में जीरा वाली कहावत को सच कर दिया। मानदेय न के बराबर है। मुख्यमंत्री से प्रदेश के प्रधानों को इस प्रकार की उम्मीद नहीं थी।

-विनोद कुमार ठाकुर, प्रधान नलसर।

Posted By: Jagran

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