मनाली फोरलेन: 2600 करोड़ के पंडोह बाईपास प्रोजेक्ट की टनलों से सुहाना होगा सफर, 6 साल में तैयार हुई दयोड़ सुरंग
कीरतपुर-मनाली फोरलेन के पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट के प्रवेश द्वार की टनलों का सफल ट्रायल हुआ है। अगले चार दिनों ...और पढ़ें

मनाली हाईवे पर दयाेड़ टनल के सफल ट्रायल के बाद एनएचएआई के अधिकारी व अन्य।
HighLights
पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट की टनलों का सफल ट्रायल।
अगले चार दिनों में यातायात के लिए खुलेंगी सुरंगें।
मानसून में भूस्खलन और ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत।
विशाल वर्मा, पंडोह (मंडी)। कीतरपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत टनल के सबसे महत्वपूर्ण पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट के प्रवेश द्वार की टनलों का ट्रायल सफल हो गया है। अब यहां पर अगले चार दिनों में यातायात पूरी तरह से सुचारू हो जाएगा। सोमवार को एनएचएआई के बोर्ड सदस्य विपनेश शर्मा की मौजूदगी में यह ट्रायल किया गया। इसके बाद पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी यहां पहुंचे और उन्होंने भी टनल का जायजा लिया।
2600 करोड़ के प्रोजेक्ट का प्रवेश द्वार हुआ शुरू
2600 करोड़ के पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट में 10 टनल बनी हैं। दयोड़ से हणोगी तक बनी चार टनलें इस प्रोजेक्ट का प्रवेश द्वार हैं। इनमें से अभी एक साइड की दो टनलों को ही यातायात के लिए खोला जाएगा, जिनकी लंबाई 2.8 किमी और 700 मीटर है।
2020 में शुरू हुआ था कार्य
दयोड़ सुरंग का निर्माण कार्य वर्ष 2020 में शुरू हुआ था। करीब छह वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अब यह जुड़वां सुरंगें बनकर तैयार हैं। मानसून के मौसम में पंडोह-औट मार्ग पर भूस्खलन और घंटों लगने वाले ट्रैफिक जाम से यात्रियों को अब राहत मिलेगी। शुरुआती चरण में एक तरफ की दो सुरंगों को ही यातायात के लिए खोला जा रहा है, जिसमें एक सुरंग के भीतर डबल लेन ट्रैफिक संचालित होगा।
140 मीटर लंबे पुल से जुड़ी हैं दयोड़ और हणोगी सुरंगें
पंडोह बाईपास टकोली प्रोजेक्ट का प्रवेश द्वार मानी जाने वाली दयोड़ सुरंग की लंबाई करीब 2.8 किलोमीटर है, जबकि हणोगी सुरंग की 700 मीटर लंबी है। खोतीनाला के पास इन दोनों सुरंगों को आपस में जोड़ने के लिए 45 मीटर ऊंचा और 140 मीटर लंबा एक पुल निर्मित किया गया है।
50 करोड़ से हणोगी सुरंग की मरम्मत
वर्ष 2025 की भीषण आपदा के दौरान हणोगी सुरंग के मुहाने का लगभग 26 मीटर हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे इस मार्ग को खोलने में देरी हुई। एनएचएआइ ने मरम्मत की कमान भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपी। कंपनी की टीम ने दिन-रात एक करके करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में क्षतिग्रस्त हिस्से और सुरक्षा संरचनाओं का पुनर्निर्माण पूरा किया।
कुछ सुरक्षा मानकों को पूरा करने के निर्देश
एनएचएआई के बोर्ड सदस्य विपनेश शर्मा ने कहा कि सामरिक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। अभी यहां जायजा लेने के बाद कुछ सुरक्षा मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले चार दिनों में इन सुरक्षा मानकों को पूरा करके यातायात को सुचारू कर दिया जाएगा।
उन्होंने इस बेहतरीन कार्य के लिए एनएचएआई, शापुरजी-पलौनजी, एफकॉन्स, गावर कंस्ट्रक्शन और भारत कंस्ट्रक्शन को बधाई दी। उन्होंने बाकी कार्य का जायजा भी लिया।
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