मंडी, जेएनएन। उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि देश के कुछ हिस्सों में निपाह वायरस के मामले सामने आने से लोगों के बीच आशंका का माहौल बना हुआ है। मंडी जिला में इस तरह का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है। इसके बावजूद इससे निपटने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं और जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी चिकित्सा अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर अलग से वार्ड की भी व्यवस्था की गई है।

निपाह वायरस के उपचार का एकमात्र तरीका कुछ सहायक दवाइयां और पेलिएटिव केयर है। वायरस की इनक्यूबेशन अवधि 5 से 14 दिनों तक होती है। इसके बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सामान्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, बेहोशी और मितली शामिल होती हैं, कुछ मामलों में व्यक्ति को गले में कुछ फंसने का अनुभव, पेट दर्द, उल्टी, थकान और निगाह का धुंधलापन महसूस होता है। उन्होंने बताया कि लक्षण शुरू होने के दो दिन बाद पीड़ित के कोमा में जाने की संभावना बढ़ जाती है, वहीं संक्रमण की भी संभावना बनी रहती है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है।

कुछ सावधानियां बरतने से निपाह वायरस से बचा जा सकता है। उपायुक्त ने कहा कि परिदों द्वारा कुतरे हुए फल न खाएं और पाम के पेड़ के पास खुले कंटनर में बनी टोडी शराब पीने से बचें तथा बीमारी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति से नजदीकी संपर्क न करें और यदि मिलना ही पड़े तो बाद में साबुन से अपने हाथों को धो लें। किसी चमगादड़ के मरने से यह वायरस आमतौर पर नहीं फैलता है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उप निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, पशु पालन तथा उद्यान विभाग को भी इस संबंध में आवश्यक प्रबंधों के लिए निर्देश जारी किए हैं।

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