संवाद सहयोगी, मंडी : सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में बुधवार को शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में भारत की पुरातन शिक्षा को पुन: जीवित करने और अपनाने पर बल दिया गया। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला एवं हिम साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में भौतिक विज्ञान पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विकसित करने के लिए संगोष्ठी एवं कार्यशाला का शुभारंभ बुधवार को सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के कुलपति प्रो. देवदत्त शर्मा ने किया।

कार्यशाला के आरंभ सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय मूल्यांकन संस्थान बेंगलुरु के सदस्य प्रो. नागेश ठाकुर, आइआइटी मंडी की डा. बिदु राधामानी, डा. गौरीशंकर साहू जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली की प्रो. रुचिर गुप्ता, डीन अकादमिक प्रो. दीपक पठानिया व कालेज मामलों के डीन सरदार पटेल विश्वविद्यालय प्रो. राजेश शर्मा मंडी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कुलपति प्रो. डीडी शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुख्य विशेषताओं पर विस्तृत जानकारी दी। प्रो. नागेश ठाकुर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आवश्यकता एवं भारत की पुरातन शिक्षा को पुन: जीवित करने तथा अपनाने पर बल दिया। कार्यशाला में देश के 80 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक भाग ले रहे हैं। बुधवार को चार तकनीकी सत्र हुए। इनमें प्रो. भागचंद चौहान, प्रो. आरती वर्मा, डा. विकास ठाकुर, प्रो. अविनाश पांडे, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. गौरंग चंद्र मोहंती और प्रो. सुनील द्विवेदी ने अपने वक्तव्य दिए। वीरवार को प्रात: सत्र में तीन टेक्निकल सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यशाला के मंथन व सुझाव भौतिक विज्ञान के पाठ्यक्रम को विकसित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय नई दिल्ली को प्रेषित किए जाएंगे। 30 जून को सायंकालीन सत्र में इस कार्यशाला का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसकी मुख्य अतिथि सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी की प्रति-कुलपति प्रो. अनुपमा सिंह होंगी। कार्यशाला में 150 शिक्षाविदों ने भाग लिया।

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